दुनिया भर में कई पौधों में अब पहले की तुलना में जल्दी फूल खिलने लगे हैं। पूरा ध्यान बढ़ते तापमान पर जाता है। लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार केवल गर्मी बढ़ना ही इसका कारण नहीं है। जैसे, ग्रीनहाउसों में सिर्फ ज़्यादा तापमान देने से फूल समय से पहले नहीं खिले। एक नए अध्ययन से पता चला है कि पत्तियों पर जमा होने वाली ओस की बूंदें इस जल्दबाज़ी की वजह हो सकती हैं।    
शोधकर्ताओं के अनुसार, जब पानी की बहुत सूक्ष्म बूंदें पत्तियों पर जमती हैं, तो वे कुछ रासायनिक अभिक्रियाएं शुरू करवाती हैं। ये अभिक्रियाएं पौधे को संकेत देती हैं कि अब फूल बनाने का समय आ गया है। तो लगता है कि केवल बढ़ता तापमान नहीं, बढ़ती नमी के कारण बनने वाली ओस भी पौधों के व्यवहार को प्रभावित कर सकती है।
पहले किए गए प्रयोगों से यह स्पष्ट था कि थोक पानी की तुलना में पानी की बहुत छोटी बूंदें अलग तरह से व्यवहार करती हैं। जब ऐसी सूक्ष्म बूंदें किसी ठोस अजैविक सतह पर बनती हैं, तो उनमें खास रासायनिक अभिक्रियाएं शुरू हो सकती हैं। देखा गया था कि इन अभिक्रियाओं के कारण वहां मूलक बनते हैं जिनमें अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं। इस अवलोकन से यह सवाल पैदा हुआ कि यदि ऐसी ही बूंदें किसी सजीव सतह (जैसे पत्ती) पर जमें तो क्या परिणाम होगा।  
इसको समझने के लिए वैज्ञानिकों ने एक छोटे फूलदार पौधे एरेबिडॉप्सिस थैलियाना पर प्रयोग किए। यह ब्रेसिकेसी कुल का पौधा है।
विस्तृत प्रयोगों में पाया गया कि इस पौधे की पत्तियों पर ओस जमने पर, वहां होने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं के परिणामस्वरूप हाइड्रोजन पैरॉक्साइड और नाइट्रिक ऑक्साइड बनते हैं। नाइट्रिक ऑक्साइड पौधों और जंतुओं में एक जाना-माना महत्वपूर्ण संकेतक अणु है। यह बूंद से पौधे की कोशिकाओं में पहुंचकर ऐसी जैव-रासायनिक प्रक्रियाएं शुरू करवाता है, जो अंतत: पुष्पन की प्रक्रिया को सक्रिय कर देती हैं। 
पुष्टि के लिए वैज्ञानिकों ने 30 से अधिक वर्षों में जुटाए गए ब्रेसिकेसी कुल के लगभग 1.2 करोड़ पौधों के पुष्पन रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। उन्होंने फूल खिलने के समय की तुलना 11 अलग-अलग मौसम सम्बंधी कारकों से की। फूल खिलने के समय का सम्बंध तापमान और दिन की लंबाई के अलावा ओस बिंदु से भी देखा गया। ओस बिंदु हवा में उपस्थित नमी और हवा के तापमान से जुड़ा है। 
हालांकि सभी वैज्ञानिक पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं लेकिन यदि ये निष्कर्ष सही साबित होते हैं, तो वैज्ञानिकों की यह समझ बदल सकती है कि गर्माती जलवायु में पौधे कैसे प्रतिक्रिया करते हैं। यदि केवल तापमान ही नहीं, बल्कि हवा की नमी में छोटे बदलाव भी फूल आने के समय को प्रभावित कर सकते हैं, तो इस शोध का व्यावहारिक उपयोग भी हो सकता है। भविष्य में किसान नियंत्रित फुहार या हल्की नमी देकर फूलने का समय बदल सकते हैं और फसल उत्पादन बढ़ा सकते हैं। (स्रोत फीचर्स)