जाड़े का मौसम तो चला गया है लेकिन जाते-जाते एक सवाल का जवाब मिल गया है: कुछ लोगों को ठंड कम क्यों लगती है? इसका कारण है हमारे शरीर की बनावट, अनुकूलन की क्षमता और हमें मिले वंशानुगत गुण।
युनिवर्सिटी ऑफ ओटावा के जीवविज्ञानी फ्रांस्वा हेमन के अनुसार, इंसान का शरीर नैसर्गिक रूप से बहुत ज़्यादा ठंड सहने में माहिर नहीं है। हम आसानी से शरीर की गर्मी गंवा देते हैं। फिर भी हर व्यक्ति को ठंड अलग-अलग तरह से महसूस होती है। और, इसमें हमारी जीवनशैली व जैविक बनावट, दोनों की अहम भूमिका होती है। 
ठंड सहने में एक भूमिका अनुकूलन की भी होती है। जो लोग गर्म इलाकों से ठंडे स्थानों पर जाते हैं, उन्हें शुरुआत में ज़्यादा दिक्कत होती है। लेकिन लगातार उस स्थान पर रहने से धीरे-धीरे शरीर ठंड के मुताबिक खुद को ढाल लेता है। इस प्रक्रिया को अनुकूलन कहते हैं।
शरीर का आकार भी मायने रखता है। छरहरे शरीर या छोटे कद वाले लोग जल्दी गर्मी गंवाते हैं, जबकि बड़े डील-डौल वाले लोग गर्मी देर तक सहेज पाते हैं। खासकर मांसपेशियां बहुत महत्वपूर्ण होती हैं, क्योंकि वे काम करते समय गर्मी पैदा करती हैं। इसलिए जिन लोगों की मांसपेशियां ज़्यादा होती हैं, वे अंदर से अधिक गर्मी बनाते हैं। ठंड से बचाव के मामले में मांसपेशियां शरीर की सबसे मज़बूत ढालों में से एक हैं।
लेकिन, सिर्फ शरीर का आकार ही पूरी कहानी नहीं है। आर्कटिक जैसे बेहद ठंडे इलाकों में रहने वाले कुछ समुदाय (जैसे ग्रीनलैंड के इनुइट लोग) अपेक्षाकृत छोटे कद के बावजूद कड़ाके की ठंड आसानी से सह लेते हैं। शोध में पाया गया है कि कुछ लोगों के जीन ऐसे होते हैं जो ‘भूरी वसा' नाम की खास वसा के विकास से जुड़े हैं। यह वसा शरीर में गर्मी पैदा करने में मदद करती है। इसके अलावा, जीन यह भी तय करते हैं कि शरीर में चर्बी कैसे वितरित होगी और मांसपेशियां कैसे काम करेंगी। इन कारणों से कुछ लोग अपने शरीर का अंदरूनी तापमान दूसरों की तुलना में बेहतर तरीके से बनाए रख पाते हैं।
जीन इस बात को भी प्रभावित कर सकते हैं कि ठंड में हमारी रक्त वाहिकाएं कैसे प्रतिक्रिया देती हैं। जब मौसम बहुत ठंडा होता है, तो त्वचा और हाथ-पैरों की ओर बहने वाला खून कम हो जाता है, ताकि हृदय और दूसरे ज़रूरी अंगों के आसपास गर्मी बनी रहे। इसी कारण उंगलियां और पैर ज़्यादा ठंडे महसूस होते हैं, लेकिन इससे शरीर का केंद्रीय तापमान सुरक्षित रहता है। कुछ लोगों में जीन इस प्रक्रिया को और बेहतर तरीके से नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
कुल मिलाकर, ठंड लगना कई कारणों से तय होता है। इसमें डील-डौल, अनुकूलन क्षमता और जेनेटिक्स तीनों मिलकर असर डालते हैं। (स्रोत फीचर्स)
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Srote - May 2026
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