स्कॉच टेप क्या है? पतले प्लास्टिक का एक लंबा फीता जिसकी एक सतह पर चिपकू गोंद होती है, जिसे एक गोले पर सलीके से लपेटा होता है। (कुछ किस्म के टेप में कागज़ या कपड़े के फीते होते हैं।) जब गोले से टेप निकालते हैं, तो अक्सर यह होता है कि शुरुआत में तो टेप ठीक से निकलता है, लेकिन फिर हल्का-सा अटककर निकलता है, और इसी के साथ आती है चर्रर्ररर-चर्रर्ररर की आवाज़। खासकर एक साथ लंबा टेप निकालते समय आपने ज़रूर यह आवाज़ सुनी होगी। लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा कि यह आवाज़ आती क्यों है? चलिए आपने सोचा हो या नहीं, लेकिन वैज्ञानिकों ने ज़रूर इस बारे में सोचा और इसका कारण पता करने में जुट गए।
2010 में किंग अब्दुल्ला युनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नॉलॉजी के भौतिकशास्त्री सिगुरदुर थोरोडसन ने उच्च क्षमता वाले कैमरों की मदद टेप निकालने की बारीक से बारीक हरकत को रिकॉर्ड किया था। तब उन्होंने पाया था कि जब टेप आसानी से निकलता हुआ दिखता है, तब भी बहुत सूक्ष्म स्तर पर अटक-अटक कर निकलता है जो पता नहीं चलता। इसे उन्होंने स्लिप-स्टिक मोशन (फिसलना-चिपकना) कहा था।
इसके अलावा, उन्होंने पाया था कि टेप निकालने में जब सूक्ष्म स्तर पर (अगोचर) अटकाव होता है तब स्लिप फेज़ (फिसलने) के दौरान टेप की चिपकू सतह पर महीन दरारें बन जाती हैं। ये दरारें टेप खींचने की दिशा के लंबवत बनती हैं। ये टेप निकालते समय टेप पर लकीरें बनी दिखती हैं।
अनुमान था कि चर्रर्ररर की आवाज़ इन दरारों के आगे वाले किनारे से आती है। इसे जांचने के लिए उन्होंने टेप की चिपकू सतह पर बनी दरारों और टेप निकालते समय आसपास की हवा में उत्पन्न तरंगों को रिकॉर्ड करने का सेटअप जमाया।
उन्होंने दो सेंटीमीटर मोटी कांच की पट्टी पर टेप चिपकाया। इस पट्टी के नीचे की ओर से एक हाई-स्पीड कैमरा निकाले जा रहे टेप की हरकत रिकॉर्ड कर रहा था। और, टेप की चौड़ाई के दो किनारों पर लगे माइक्रोफोन टेप निकालने से उत्पन्न आवाज़ें रिकॉर्ड कर रहे थे। दोनों तरह की रिकॉर्डिंग के विश्लेषण से पता चला कि दरारें टेप के एक किनारे से शुरू होकर टेप की चौड़ाई में फैलती हैं, और अक्सर कई दरारें तेज़ी से एक के बाद एक, एक ही दिशा में फैलती चली जाती हैं। शोधकर्ताओं को अगले किनारे पर इस हरकत से उत्पन्न कोई तरंगें नहीं दिखी। यानी, उनका पूर्वानुमान गलत निकला। लेकिन, जब दरारें फैलकर टेप के दूसरे छोर पर पहुंचीं, तो माइक्रोफोन ने हवा में तीव्र तरंगें रिकॉर्ड कीं।
फिज़िकल रिव्यू ई में शोधकर्ताओं ने बताया कि दरारें सुपरसोनिक गति से चलती हैं - यानी, ध्वनि की गति से भी तेज़। इतनी तेज़ गति चर्रर्ररर की आवाज़ पैदा करने में अहम भूमिका निभाती है। 
होता यह है कि जैसे ही टेप की चिपकू सतह पर दरार बनने की शुरुआत होती है वहां निर्वात बनता जाता है। हवा दरार से बने निर्वात को भरने के लिए घुसती है। लेकिन, चूंकि दरार के फैलने की गति ध्वनि से भी तेज़ होती है, हवा पूरे निर्वात को तुरंत नहीं भर पाती। इसलिए दरार के टेप के दूसरे छोर तक पहुंचने तक कम दबाव बना रहता है, और अंतत: दूसरे छोर पर पहुंचने के बाद खत्म होता है। यानी हम जो चर्रर्ररर की आवाज़ सुनते हैं यह कम दबाव की रेखाओं के दूसरे छोर पर पहुंचकर हवा से भर जाने के कारण आती है।
उम्मीद है टेप निकालने की यांत्रिकी और ध्वनिकी को बेहतर ढंग से समझकर टेप निकालने की आवाज़ को कम किया जा सकेगा। हो सकता है टेप निकालने की यह आवाज़ हम-आप को इतना परेशान न करती हो, क्योंकि हमारा टेप चिपकाने-निकालने से इतना वास्ता नहीं पड़ता। लेकिन जो लोग पैकेजिंग का काम करते हैं उन्हें शायद लगातार टेप की चर्रर्ररर की आवाज़ आती रहती है जो उन्हें परेशान करती हो। बहरहाल, इस शोध का विषय इगनोबल के लिए भी उम्मीदवार लगता है। (स्रोत फीचर्स)