एक्सरसाइज़ (व्यायाम) का नाम सुनते ही क्या ख्याल आता है? मज़बूत मसल्स, स्वस्थ दिल, स्वस्थ फेफड़े यानी तंदुरुस्त शरीर। और यदि कहा जाए कि शरीर की इस तंदुरुस्ती में मस्तिष्क भी शामिल है तो? 
जी हां, न्यूरॉन जर्नल में प्रकाशित हालिया अध्ययन यही बात कहता है; व्यायाम से मस्तिष्क की वायरिंग मज़बूत होती है, जिससे कुछ न्यूरॉन्स फटाफट सक्रिय हो जाते हैं। इससे समझ आता है कि लगातार व्यायाम करने से व्यायाम में होने वाली आसानी और बेहतर क्षमता (यानी व्यायाम सहिष्णुता) में मस्तिष्क सक्रिय रूप से शामिल होता है। फिलहाल यह निष्कर्ष चूहों पर हुए अध्ययन के आधार पर है, हो सकता है कि ऐसा मनुष्यों में भी होता हो लेकिन पहले इसे परखना होगा।  

              व्यायाम के बाद चूहों के सक्रिय न्यूरॉन्स 

फिलेडेल्फिया में पेन्सिलवेनिया युनिवर्सिटी के न्यूरोसाइंटिस्ट निकोलस बेटली और उनके साथी यह जानना चाहते थे कि जब लोग व्यायाम करते हैं तो मस्तिष्क में क्या होता है। असल में पूर्व अध्ययन में ऐसा पाया गया था कि स्टेरॉयडोजेनिक फैक्टर-1 (SF1) नामक प्रोटीन को कोड करने वाले जीन को ठप करने से चूहों में व्यायाम सहिष्णुता कम हो जाती है। इसलिए शोधकर्ताओं ने मस्तिष्क के वेंट्रोमीडियल हाइपोथैलेमस हिस्से के उन न्यूरॉन समूहों की निगरानी करना तय किया जो SF1 नामक प्रोटीन बनाते हैं। गौरतलब है कि वेंट्रोमीडियल हाइपोथैलेमस भूख और रक्त शर्करा को नियंत्रित करने के लिए ज़िम्मेदार होता है, और SF1 प्रोटीन चयापचय क्रिया को नियंत्रित करने में भूमिका निभाता है।
शोधकर्ताओं ने चूहों को ट्रेडमिल पर दौड़ाया और उनमें SF1 न्यूरॉन्स की गतिविधि देखी। ये तो उन्होंने पाया ही कि ये न्यूरॉन्स व्यायाम करने से सक्रिय हो गए थे, लेकिन और भी दिलचस्प बात उन्हें यह पता चली कि SF1 न्यूरॉन्स का एक समूह व्यायाम खत्म होने के बाद ही सक्रिय होता है। कई व्यायाम सत्रों के बाद चूहों में सक्रिय होने वाले न्यूरॉन्स की संख्या और उनकी सक्रियता के परिमाण में भी बढ़ोतरी देखी गई।
जब शोधकर्ताओं ने तीन हफ्तों तक लगातार नियमित व्यायाम करने वाले चूहों की मस्तिष्क गतिविधि की तुलना उन चूहों की मस्तिष्क गतिविधि से की जिन्होंने व्यायाम करने में नागा किया था, तो उन्हें दोनों समूह के चूहों के SF1 न्यूरॉन्स के विद्युतीय गुणों में अंतर मिला। नियमित व्यायाम करने वाले चूहों में न्यूरॉन्स को सक्रिय करना आसान हो गया था। साथ ही न्यूरॉन्स के बीच कनेक्शन्स (सायनेप्स) की संख्या भी दुगनी हो गई थी।
अनुमान तो लगाया जा सकता है कि शायद मनुष्यों में भी ऐसा कुछ होता होगा, लेकिन इसे परख कर देखना ज़रूरी है। आखिरकार यह तो देखा ही गया है कि मनुष्यों में भी व्यायाम शुरू करने के बाद कुछ दिन थोड़ा तकलीफदेह गुज़रते हैं, लेकिन दिन-ब-दिन आसानी होने लगती है। (स्रोत फीचर्स)