यह तो सब जानते हैं कि चींटियां सामाजिक कीट हैं और कॉलोनी बनाकर रहती हैं। कॉलोनी में जहां बहुत सारी श्रमिक चींटियां बिल बनाने, भोजन भंडारण, देखरेख, सुरक्षा जैसे काम करती हैं, वहीं रानी चींटी का मुख्य काम प्रजनन और फेरोमोन्स स्राव के ज़रिए कॉलोनी की गतिविधियों का नियंत्रण होता है। एक तरह से कॉलोनी में सत्ता रानी चींटी की होती है। 
सामान्य तौर पर कॉलोनी में सत्ता परिवर्तन तब होता है जब रानी चींटी, बहुत बीमार पड़ जाती है या मर जाती है। श्रमिक चींटियों को रानी द्वारा स्रावित फेरोमोन मिलना बंद हो जाता है, जो उन्हें नियंत्रित रखते थे और उनकी प्रजनन क्षमता दबाए रखते थे। अब श्रमिक चींटियों में से कोई रानी चींटी बन जाती है। या फिर, सत्ता परिवर्तन तब भी होता है जब कोई घुसपैठिया चींटी कॉलोनी में घुस जाती है और कॉलोनी की रानी चींटी को मारकर या खदेड़कर श्रमिक चींटियों पर अपना नियंत्रण जमा लेती है। ऐसा अमूमन नए सिरे से कॉलोनी बसाने की मशक्कत से बचने के लिए किया जाता है। कीटों में इस तरह की रणनीतियां देखने को मिलती हैं और इसे परजीविता कहते हैं। इसमें कई प्रजातियां पराए संसाधनों को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने के लिए तमाम तरह के हथकंडे अपनाती हैं। जैसे, कुछ चींटी प्रजातियां अपने बच्चों का पालन-पोषण दूसरी प्रजातियों की चींटियों से करवाती हैं, जबकि कुछ अपनी कॉलोनियों का कार्यबल बढ़ाने के लिए दूसरी प्रजातियों के बच्चे चुरा लाती हैं।
अब, हाल ही में पता चला है कि कुछ घुसपैठिया/परजीवी चींटियां किसी कॉलोनी पर काबिज़ होने के लिए सीधा हमला करने की बजाय चालाकी का सहारा लेती हैं: कॉलोनी की श्रमिक चींटियों को उनकी अपनी ही रानी (जो जैविक रूप में उनकी मां/जननी भी होती है) के खिलाफ भड़काती हैं, और उनसे रानी की हत्या करवाती हैं।
दरअसल, कुछ समय पहले क्यूशू विश्वविद्यालय के व्यवहार पारिस्थितिकीविद केइज़ो ताकासुका ने एक वीडियो में देखा था कि लैसियस ओरिएंटलिस प्रजाति की रानी चींटियां कैसे अपनी निकट सम्बंधी प्रजाति लैसियस फ्लेवस की कॉलोनी पर कब्ज़ा कर लेती हैं। वीडियो में एल. ओरिएंटलिस प्रजाति की रानी चींटी को एल. फ्लेवस प्रजाति की चींटियों की कॉलोनी में रखकर उनके व्यवहार को रिकॉर्ड किया गया था। वीडियो में कुछ चौंकाने वाली चीज़ें दिखीं: श्रमिक चींटियां अपनी ही रानी को मार रही थीं।
ताकासुका ने उत्सुकतावश ऐसा ही अध्ययन एक अन्य परजीवी चींटी प्रजाति एल. अमब्रैटस पर किया, जो एल. जेपोनिकस कॉलोनी को अपना मेज़बान बनाती है। पता चला कि वे भी नियंत्रण के लिए ऐसा ही तरीका अपनाती हैं। हमलावर रानी चींटी पहले मेज़बान श्रमिक चींटियों के साथ घुलती-मिलती है ताकि वह शक की निगाहों से बची रहे; इसके लिए वह कॉलोनी की विशिष्ट गंध अपने शरीर पर पोत लेती है। और फिर, मेज़बान प्रजाति की रानी को ढूंढती है। मेज़बान रानी मिलते ही उसके ऊपर अपने पेट से निकला बदबूदार द्रव (संभवत: फॉर्मिक एसिड) छिड़क देती है और खुद वहां से रफूचक्कर हो जाती है। यह रानी की अपनी नैसर्गिक गंध को दबा देता है और उसे दुश्मन-सी पहचान दे देता है -इस तरह उस कॉलोनी की रानी चींटी ‘मां’ से ‘दुश्मन’ बन जाती है।
मेज़बान श्रमिक चींटियां अपनी रानी को दुश्मन समझ उस पर हमला करती हैं और उसे मार डालती हैं। रानी के खात्मे के बाद परजीवी चींटी कॉलोनी में पुन: प्रवेश करती है, अपने अंडे देती है और श्रमिकों पर हुकूमत करने लगती है।
सवाल है कि परजीवी मेज़बान रानी को सीधे मारने के बजाय चालाकी से क्यों मरवाती है? शायद इसलिए कि सीधे हमला करने से कड़ी सुरक्षा कर रहीं श्रमिक चींटियां उस पर हमला कर सकती हैं। इसलिए खुद के बचाव के लिए उसी की संतान श्रमिकों को भड़काकर ‘उनसे ही हमला करवाना’ सुरक्षित है।
विशेषज्ञ कहते हैं कि जननी-हत्या का व्यवहार - जीवों द्वारा अपनी ‘जननी’ को मारना या खाना - जीव-जंतुओं के बीच दुर्लभ है। इस मामले में, इस व्यवहार से एकमात्र फायदा परजीवी रानी का दिखता है, जो नए सिरे से अपनी कॉलोनी बसाने की मेहनत और जोखिमों से बचना चाहती है, बसी-बसाई कॉलोनी हथिया लेती है। (स्रोत फीचर्स)