साइंटिफिक रिपोर्ट्स जर्नल के जुलाई 2024 के अंक में वी. वियालॉन और साथियों द्वारा एक रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी। इस रिपोर्ट में विशिष्ट रोगों के होने के जोखिम की जांच के लिए एक स्वस्थ जीवनशैली सूचकांक (HLI) के उपयोग पर चर्चा की गई थी। अध्ययन में शोधकर्ताओं ने देखा था कि हर जीवनशैली का रोगों का शिकार होने से क्या सम्बंध है। इसके लिए उन्होंने युरोपियन पर्सपेक्टिव इनवेस्टीगेशन इनटू कैंसर एंड न्यूट्रीशियन (EPIC) के डैटा और टाइप-2 डायबिटीज़, कैंसर और हृदय सम्बंधी विकारों से होने वाली अकाल मृत्यु के जोखिम का डैटा उपयोग किया था। इनमें से कुछ तरह की जीवनशैली में धूम्रपान करना, अत्यधिक मद्यपान करना, खान-पान की आदतें, मोटापा (शरीर में अतिरिक्त वसा) और अत्यधिक नींद जैसी अस्वास्थ्यकर चीज़ें भी शामिल थीं।
इसी सिलसिले में, स्पेन के रेनाल्डो कॉर्डोवा और डेनमार्क, दक्षिण कोरिया, और उत्तरी आयरलैंड-यूके के सह-लेखकों का एक शोधपत्र दी लैंसेट - हेल्दी लॉन्गेविटी के अगस्त 2025 के अंक में प्रकाशित हुआ था, जिसका शीर्षक था ‘वनस्पति-आधारित आहार पैटर्न एवं कैंसर तथा कॉर्डियोमेटाबोलिक रोगों की बहु-रुग्णता का आयु-विशिष्ट जोखिम: एक दूरदर्शी विश्लेषण' (Plant-based dietary patterns and age-specific risk of multimorbidity of cancer and cardiometabolic diseases: a prospective analysis)। ‘मल्टीमॉर्बिडिटी' का मतलब है एक ही व्यक्ति में दो या दो से अधिक जीर्ण (क्रॉनिक) रोग होना।
शोधकर्ताओं ने ऐसे मल्टीमॉर्बिड कैंसर से पीड़ित लगभग 2.3 लाख लोगों का डैटा EPIC डैटा बैंक से लिया और 1.81 लाख लोगों का डैटा यूके बायोबैंक से लिया और उसका विश्लेषण किया। उन्होंने चयापचय रोगों में इंसुलिन प्रतिरोध तंत्र की महत्वपूर्ण भूमिका पाई। 35-70 वर्ष की आयु वाले विशिष्ट समूहों के लोगों की खान-पान की आदतों जैसी विशेषताओं की तुलना करने पर शोधकर्ताओं ने पाया कि वनस्पति-आधारित स्वास्थ्यकर आहार कैंसर और कॉर्डियोमेटाबोलिक रोगों की बहु-रुग्णता का बोझ कम कर सकता है।
अध्ययन में इस बात के प्रमाण भी मिले हैं कि कैसे पशु उत्पाद (मांस, मछली, अंडे सहित) की अधिकता वाले आहार की तुलना में पादप-आधारित आहार पर्यावरण की दृष्टि से अधिक निर्वहनीय होता है। शोधकर्ताओं ने स्वास्थ्यकर वनस्पति-आधारित आहार के सेवन का कैंसर और (उच्च रक्तचाप, दिल का दौरा और टाइप-2 डायबिटीज़ सहित) हृदय रोगों के कम जोखिम से मज़बूत सम्बंध पाया।
तंबाकू उत्पादों के सेवन से भी कैंसर होता है। बहुप्रशंसित भूमध्यसागरीय आहार को बहुत अच्छा बताया गया है, हालांकि भूमध्यसागरीय आहार में मछली, चिकन और रेड वाइन भी शामिल होती है। गौरतलब है कि शाकाहारी या वीगन आहार (जिसमें पशु-आधारित कोई भी वस्तु शामिल नहीं होती है) से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन भी कम होता है। शाकाहारी आहार में दूध और कभी-कभी अंडे का सेवन शामिल होता है। लेकिन वीगन आहार में दूध, जो कि एक पशु उत्पाद है, से भी सख्त परहेज़ किया जाता है।
भारत की स्थिति
भारत की बात करें तो लगभग 35 प्रतिशत लोग शाकाहारी हैं; वे अपने दैनिक भोजन में अनाज और सब्ज़ियों के साथ दूध भी लेते हैं; इनमें से कुछ लोग अंडे भी खाते हैं। लगभग 10 प्रतिशत लोग वीगन हैं, जो दूध या कोई भी दुग्ध उत्पाद नहीं खाते।
किसी व्यक्ति में दो या उससे अधिक जीर्ण स्वास्थ्य स्थितियों की उपस्थिति चिंताजनक है। अनुमान है कि 16.4 प्रतिशत शहरी आबादी डायबिटीज़ से पीड़ित है जबकि 8 प्रतिशत ग्रामीण आबादी डायबिटीज़-पूर्व स्थिति में है। लगभग 26 प्रतिशत शहरी भारतीय पुरुष और महिलाएं चयापचय विकारों के साथ इंसुलिन प्रतिरोधी भी हैं। दुर्भाग्य से, उनमें से लगभग 29 प्रतिशत लोग बीड़ी, सिगरेट और हुक्का पीते हैं, और इनमें मौजूद तंबाकू कैंसर का कारण बनता है। ग्रामीण आबादी न केवल धूम्रपान करती है बल्कि कई लोग सुपारी भी खाते हैं, जिसकी अधिकता से मुंह का कैंसर हो सकता है। 60 वर्ष से अधिक आयु के 16 प्रतिशत लोग मधुमेह से पीड़ित हैं और इसके अलावा वे उम्र से सम्बंधित मनोभ्रंश और अल्ज़ाइमर जैसे रोगों से भी पीड़ित हैं।
वक्त रहते चिकित्सा समुदाय, राजनेता, केंद्र व राज्य सरकारों को ध्यान देकर कोई रास्ता निकालना चाहिए। (स्रोत फीचर्स)