दुनिया के सबसे विशाल वर्षावन अमेज़न पर खतरा अब कोई दूर की आशंका नहीं, बल्कि एक आसन्न सच्चाई है। वनों की अंधाधुंध कटाई, तेल और गैस के खनन तथा जलवायु परिवर्तन ने इसे उस बिंदु तक पहुंचा दिया है, जहां से लौटना शायद संभव नहीं रहेगा। वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि अमेज़न अब ‘कार्बन सोखने वाले’ वन से ‘कार्बन छोड़ने वाले’ क्षेत्र में बदलने की कगार पर है।
ऐसे समय में एक नई रिपोर्ट ने अमेज़न के विनाश के लिए ज़िम्मेदार वित्तीय ढांचे को बेनकाब किया है। पर्यावरण संगठन ‘स्टैंड.अर्थ' की रिपोर्ट ‘बैंक्स वर्सेस दी अमेज़न स्कोरकार्ड’ बताती है कि 2016 में पेरिस समझौते के बाद से अमेज़न क्षेत्र में तेल और गैस परियोजनाओं को मिलने वाले वित्त का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा सिर्फ दस बैंकों से आता रहा है। इनमें जेपी मॉर्गन चेज़, सिटी बैंक ऑफ अमेरिका, इताउ युनिबैंको (ब्राज़ील) और एचएसबीसी जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इन बैंकों ने अमेज़न के भीतर जीवाश्म ईंधन से जुड़ी परियोजनाओं में 15 अरब डॉलर से अधिक झोंक दिए हैं।
युरोप पीछे हटा, अमेरिका आगे बढ़ा
पिछले कुछ वर्षों में युरोप के कई बैंकों ने अपने कदम पीछे खींचे हैं। फ्रांस का बीएनपी परिबा और ब्रिटेन का एचएसबीसी अब अमेज़न से जुड़ी कंपनियों को ऋण देना बंद कर चुके हैं। उन्होंने ऐसी नीतियां अपनाई हैं जो अमेज़न में तेल और गैस खनन कंपनियों को वित्त नहीं देतीं।
लेकिन जहां युरोपीय बैंक पीछे हटे, वहीं अमेरिका और लैटिन अमेरिका के बैंक उस खाली जगह को भरने में लगे हैं। ब्राज़ील का इताउ युनिबैंको अब शीर्ष पर पहुंच गया है - पिछले 18 महीनों में उसने 37.8 करोड़ डॉलर की नई फंडिंग दी है। जेपी मॉर्गन चेज़ और बैंक ऑफ अमेरिका उससे थोड़ा पीछे हैं। इसी अवधि में पेरू के क्रेडिकॉर्प और कनाडा के स्कोटियाबैंक ने भी अपने निवेश को लगभग तीन गुना बढ़ा दिया है।
रिपोर्ट की प्रमुख शोधकर्ता डॉ. देवयानी सिंह का कहना है, “युरोपीय बैंकों ने अपेक्षाकृत सख्त नीतियां लागू की हैं, लेकिन कोई भी बैंक अब तक अपने वित्तपोषण को शून्य नहीं कर पाया है। हर बैंक को लूपहोल बंद करने होंगे और बिना देरी अमेज़न से बाहर निकलना होगा।”
तेल के धब्बे और बीमारियां
दी इकॉलॉजिस्ट में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, अमेज़न में तेल और गैस की खुदाई सिर्फ पर्यावरण को ही नहीं, बल्कि स्थानीय जीवन को भी गहराई से प्रभावित कर रही है। ब्राज़ील, इक्वाडोर, पेरू और कोलंबिया में 6000 से अधिक तेल-संदूषित स्थल दर्ज किए गए हैं। खनन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले समुदायों में कैंसर, गर्भपात व श्वसन रोगों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
इसके बावजूद, सरकारें पीछे हटने को तैयार नहीं। ब्राज़ील ने इस साल की शुरुआत में 68 नए तेल ब्लॉक की नीलामी की। इक्वाडोर में 2023 में यासुनी नेशनल पार्क में ड्रिलिंग रोकने के पक्ष में हुए जनमत-संग्रह के बाद भी काम जारी है। पेरू में 31 नए तेल ब्लॉक आवंटित किए गए हैं, जिनमें से कई 400 से अधिक देशज समुदायों की भूमि से ओवरलैप करते हैं।
अमेज़न की ओलीविया बिसा कहती हैं, “जब जंगल खुद संकट में है, तब बैंक ऑफ अमेरिका, स्कोटियाबैंक और इताउ जैसे बैंक इन परियोजनाओं को बढ़ावा दे रहे हैं। दशकों से हमारे देशज समुदाय इस विनाश का सबसे बड़ा भार उठा रहे हैं। अब समय आ गया है कि बैंक अमेज़न को तेल की लत से मुक्त करें।”
भ्रष्टाचार और चुप्पी
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2024 से अब तक अमेज़न क्षेत्र में 2 अरब डॉलर से अधिक की नई फंडिंग केवल छह कंपनियों को मिली है - पेट्रोब्रास, एनेवा, गनवोर, ग्रैन टिएरा, प्लसपेट्रोल कैमिसेआ एवं हंट ऑयल पेरू। इन सभी पर भ्रष्टाचार, पर्यावरणीय क्षति और देशज अधिकारों के उल्लंघन के आरोप हैं।
ब्राज़ील की कंपनी एनेवा को हाल ही में संघीय अदालत ने अपनी गतिविधियां रोकने का आदेश दिया था क्योंकि उसने देशज समुदायों के अधिकारों और पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन किया था। फिर भी, उसे इताउ यूनिबैंको, बैंकू डू  ब्राज़ील, सान्टेंडर और अन्य बैंकों से वित्तपोषण मिलता रहा।
इसी तरह, स्विस कंपनी गनवोर को 2013 से 2020 के बीच इक्वाडोर में अधिकारियों को रिश्वत देकर तेल अनुबंध हासिल करने का दोषी पाया गया था, लेकिन इसके बावजूद उसे आईएनजी बैंक से वित्तीय सहायता मिलती रही। इससे यह साफ होता है कि आंशिक प्रतिबंध और ‘परियोजना-स्तर’ की नीतियां अक्सर औपचारिकता से ज़्यादा कुछ नहीं होतीं।
वित्तीय नीतियों की ज़िम्मेदारी
रिपोर्ट में सभी बैंकों से अपील की गई है कि वे 2030 तक अमेज़न में तेल और गैस परियोजनाओं के वित्तपोषण को पूरी तरह समाप्त करें - चाहे वह ऋण के रूप में हो, बॉन्ड में निवेश के रूप में हो या परामर्श सेवाओं के रूप में। साथ ही, संयुक्त राष्ट्र की देशज लोगों के अधिकारों पर घोषणा (UNDRIP) के अनुरूप नीतियां अपनाने की सिफारिश की गई है।
अमेज़न वह सांस है जिससे पृथ्वी जीवित है। पर यदि यह सांस रुक गई, तो इसका असर पूरे ग्रह पर पड़ेगा। आने वाला दशक तय करेगा कि यह महान वन जीवित रहेगा या इतिहास बन जाएगा? यह सवाल सिर्फ सरकारों या पर्यावरणविदों के लिए नहीं, बल्कि उन बैंकों के लिए भी है जिनके धन से यह विनाश चल रहा है। (स्रोत फीचर्स)