गाज़ा में हालिया युद्धविराम की घोषणा के बाद एक ओर तो लोग खुशियां मना रहे हैं, लेकिन दूसरी ओर विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक फिलिस्तीन के स्थानीय वैज्ञानिक, शिक्षक और योजनाकार पुनर्निर्माण की ज़िम्मेदारी नहीं संभालते, तब तक गाज़ा को फिर से खड़ा करना मुश्किल होगा।
यह चेतावनी उन शोधकर्ताओं की है जो युद्ध के बाद पुनर्निर्माण और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में काम करते हैं। उनका मानना है कि यदि यह काम विदेशी संस्थाओं या सरकारों के हाथों में दिया गया, तो पहले जैसी गलतियां दोहराई जा सकती हैं और असली जानकार यानी जो अपनी ज़मीन और समाज की ज़रूरतों को समझते हैं वे पीछे रह जाएंगे।
गौरतलब है कि अमेरिका द्वारा तैयार और इस्राइल द्वारा मंज़ूर की गई योजना के तहत, हमास द्वारा अपने हथियार डालने, बंधकों को रिहा करने और राजनीति से पीछे हटने की उम्मीद है। बदले में इस्राइल अपनी सैन्य कार्रवाई रोकने, सेना को गाज़ा से हटाएगा, मानवीय सहायता बढ़ाने और संयुक्त राष्ट्र को क्षेत्र में काम करने की अनुमति देगा। हालांकि इस योजना में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि गाज़ा का पुनर्निर्माण कैसे होगा और उससे भी महत्वपूर्ण कि कौन करेगा।
अक्टूबर 2023 में शुरू हुए इस्राइल के सैन्य अभियान ने गाज़ा को पूरी तरह तबाह कर दिया। अगस्त के अंत तक सहायता पर लगे प्रतिबंधों के कारण लोगों को खाने की भारी कमी का सामना करना पड़ा। एक स्वतंत्र समिति की रिपोर्ट के अनुसार, पांच लाख से अधिक लोग भुखमरी से जूझ रहे हैं। वहीं, दी लैंसेट की रिपोर्ट के अनुसार पांच साल से छोटे लगभग 55,000 बच्चे गंभीर कुपोषण का शिकार हैं।
मानव संसाधन के स्तर पर भी स्थिति बहुत खराब है। 2200 से अधिक डॉक्टर्स, नर्सें और शिक्षक मारे जा चुके हैं। युनेस्को के अनुसार, लगभग 80 प्रतिशत विश्वविद्यालय और कॉलेज या तो क्षतिग्रस्त हो गए हैं या पूरी तरह ढह गए हैं, जिससे करीब 88,000 विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी है।
दक्षिण अफ्रीका स्थित नेल्सन मंडेला युनिवर्सिटी के शोधकर्ता सावो हेलीटा का अनुमान है कि युद्ध में गाज़ा के उच्च शिक्षा क्षेत्र को लगभग 222 मिलियन डॉलर (1950 करोड़ रुपए) का नुकसान हुआ है। उनका कहना है कि इसे दोबारा खड़ा करने में करीब एक अरब डॉलर लग सकते हैं, क्योंकि निर्माण से पहले मलबा हटाना और बमों को निष्क्रिय करना होगा।
इस काम के लिए आवश्यक सहायता राशि मुख्य रूप से खाड़ी देशों और तुर्की से मिलने की संभावना है। वैसे पहले के वर्षों में फिलिस्तीनी विश्वविद्यालयों को सालाना लगभग 2 करोड़ डॉलर की अल्प आर्थिक सहायता मिलती थी।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि पुनर्निर्माण केवल इमारतों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसके साथ में ऑनलाइन शिक्षा को जारी रखना होगा, विद्यार्थियों और शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा और गाज़ा के शोधकर्ताओं को दुनिया के शैक्षणिक समुदाय से दोबारा संपर्क बनाना होगा। चूंकि गाज़ा के अधिकांश विश्वविद्यालय विद्यार्थियों की फीस पर निर्भर हैं, ऐसे में सुझाव है कि अंतर्राष्ट्रीय सहायता से फीस भरी जाए ताकि विश्वविद्यालय पुनर्निर्माण के दौरान भी चलते रहें।
स्थानीय विशेषज्ञता की ताकत
विशेषज्ञों का मानना है कि गाज़ा के पुनर्निर्माण का नेतृत्व उन्हीं फिलिस्तीनियों को करना चाहिए जो अपनी ज़मीन, संस्कृति और समाज को सबसे अच्छी तरह जानते हैं। गाज़ा के शिक्षाविदों के पास अपनी धरती और लोगों की अनोखी और गहरी समझ है, जिसे कोई बाहरी व्यक्ति नहीं समझ सकता। इसके अलावा गाज़ा के माहौल को फिर से बसाने में उन लोगों की भागीदारी ज़रूरी है जो वहां रहेंगे और इसके परिणामों को झेलेंगे। इलाके के भविष्य से जुड़े फैसले उन्हीं समुदायों से आने चाहिए जो सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं।
लेकिन राष्ट्रपति ट्रम्प की पुनर्निर्माण योजना के तहत, गाज़ा की सार्वजनिक सेवाएं एक ‘तकनीकी समिति' चलाएगी, जिसमें कुछ फिलिस्तीनी और कुछ अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ होंगे। इस समिति की निगरानी ‘बोर्ड ऑफ पीस' नामक एक अंतर्राष्ट्रीय निकाय करेगा, जिसका नेतृत्व खुद ट्रम्प करेंगे और जिसमें ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर भी शामिल होंगे।
कई विशेषज्ञों के लिए यह व्यवस्था काफी चिंताजनक है, क्योंकि उन्हें डर है कि इससे फिलिस्तीनी नेतृत्व को नज़रअंदाज़ किया जा सकता है। कतर स्थित हमद बिन खलीफा युनिवर्सिटी के प्रोफेसर सुल्तान बराकात चेतावनी देते हैं कि अगर यह समिति ‘कब्ज़े का प्रबंधन’ बनकर रह गई, तो कई सम्मानित शिक्षाविद इसमें शामिल होने से इंकार कर देंगे। असली पुनर्निर्माण तभी संभव है जब फिलिस्तीनियों को योजना बनाने से लेकर शिक्षा और पर्यावरण सुधार तक में नेतृत्व और अधिकार दिया जाए।
इसी तरह का विचार गाज़ा युनिवर्सिटी के पूर्व अध्यक्ष और शोधकर्ता फरीद अल-कीक का भी है जिन्होंने युद्धविराम के जश्न के दौरान कहा कि “आज खुशी और उम्मीद का दिन है, लेकिन गाज़ा का भविष्य गाज़ा के लोगों के हाथों से ही बनना चाहिए।” (स्रोत फीचर्स)
-
Srote - December 2025
- विज्ञान के नोबेल पुरस्कार 9 वैज्ञानिकों को दिए गए
- इगनोबेल पुरस्कार: मज़े-मज़े में विज्ञान
- युद्ध, पाबंदियों और चिंताओं के साये में इगनोबेल पुरस्कार
- क्या कृत्रिम बुद्धि बता सकती है आपकी सेहत का भविष्य?
- एआई की मदद से टेलीपैथिक बातचीत
- अब खून बताएगा थकान की असली वजह
- खून की जांच से अल्ज़ाइमर की पहचान संभव है?
- रचनात्मक शौक मस्तिष्क को जवां रखते हैं
- मिठास, मीठे की पसंद और उसे दबाने के प्रयास
- दर्द निवारण के दुष्प्रभावों से मुक्ति की राह
- पश्चिमी देशों में बच्चों में मूंगफली एलर्जी घटी
- कैसे एक छोटा-सा जीव दुनिया पर छा गया
- विद्युत आवेश से निशाना साधते कृमि
- लीथियम, पर्यावरण और राष्ट्रों के बीच संघर्ष
- गाज़ा का पुनर्निर्माण: वैज्ञानिकों की भूमिका
- डीएनए संरचना के सूत्रधार वॉटसन नहीं रहे
- वन्यजीव अध्ययन को नए आयाम दिए जेन गुडॉल ने
- इरावती कर्वे: एक असाधारण जीवन की कहानी
- कीड़े-मकोड़े भी आम खाद्य हो सकते हैं
- दीमक भी खेती-किसानी करती हैं
- पाषाणकालीन चित्रकारों के पास नीला रंग भी था
