हालिया सुर्खियां बताती हैं कि दो भारतीय वैज्ञानिकों को इंजीनियरिंग डिज़ाइन श्रेणी में 2025 का इगनोबेल (Ig Nobel) पुरस्कार दिया गया है। हम सब नोबेल पुरस्कारों के बारे में तो जानते हैं, लेकिन क्या इगनोबेल पुरस्कार के बारे में जानते हैं?
साइंस पत्रिका की एक रिपोर्ट के अनुसार, इगनोबेल पुरस्कार ऐसा हल्का-फुल्का आयोजन है जो पुरस्कार पर एक प्रहसन-सा है। ‘इग (Ig)' उपसर्ग का मतलब होता है गैर-सम्माननीय या निम्न दर्जे का। यहां पुरस्कार का नाम (Ig Nobel) दरअसल ‘ignoble' शब्द पर एक तंज है। ज्ञानवर्धी (संजीदा) विज्ञान, प्रौद्योगिकी, साहित्य, शांति और अर्थशास्त्र में दिए जाने वाले वास्तविक नोबेल पुरस्कारों के विपरीत इगनोबेल पुरस्कार हास्य का पुट देते हैं।
इगनोबेल पुरस्कार वर्ष 1991 से हर साल दिए जा रहे हैं; मकसद है वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ आम लोगों के जुड़ाव को बढ़ावा देना। ये ऐसे अनुसंधान के लिए दिए जाते हैं जो पहले-पहल तो लोगों को हंसाते हैं लेकिन फिर उन्हें सोचने पर मजबूर करते हैं। प्रत्येक विजेता को 10 ट्रिलियन ज़िम्बाब्वे डॉलर का एक बैंकनोट मिलता है, जिसकी कीमत इसके चलन के समय 40 अमेरिकी सेंट थी लेकिन अब यह विमुद्रीकृत कर दिया गया है और अब ये प्रचलन में नहीं हैं। इसके विपरीत, प्रत्येक नोबेल पुरस्कार विजेता को एक स्वर्ण पदक (जिस पर पुरस्कार के संस्थापक अल्फ्रेड नोबेल की तस्वीर उकेरी होती है) और लगभग 1.1 करोड़ स्वीडिश क्रोनर मिलते हैं, जिसे अधिकतम तीन विजेताओं के बीच साझा किया जा सकता है।
प्रत्येक नोबेल विजेता को हर साल दिसंबर में स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज़ में एक समारोह में अपना व्याख्यान देने का अवसर भी मिलता है। इसके विपरीत, इगनोबेल पुरस्कार बोस्टन, मैसाचुसेट्स में आयोजित एक समारोह में दिए जाते हैं और प्रत्येक विजेता को अपनी उपलब्धियां प्रस्तुत करने के लिए केवल एक मिनट का समय दिया जाता है।
2025 के इगनोबेल विजेता
इगनोबेल पुरस्कारों का चयन एनल्स ऑफ इम्प्रॉबेबल रिसर्च पत्रिका द्वारा किया जाता है। उनकी वेबसाइट के अनुसार, 2025 के इगनोबेल पुरस्कार विजेता ये हैं:
जीव विज्ञान के लिए तोमोकी कोजिमा और उनके साथी, जिन्होंने अपने प्रयोगों के ज़रिए दिखाया है कि गायों पर ज़ेबरा जैसी काली-सफेद धारियां पोतने से मक्खियां उन्हें कम काटती हैं।
इंजीनियरिंग डिज़ाइन या एर्गोनॉमिक्स में उत्तर प्रदेश के विकास कुमार और सार्थक मित्तल, जिन्होंने बताया कि यदि जूते बदबूदार हों तो कैसे लोग उन्हें शू-रैक में रखने से कतराते हैं।
साहित्य में अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय के चिकित्सा इतिहासकार और इंटर्निस्ट प्रोफेसर विलियम बीन, जिन्होंने अपने नाखूनों के बढ़ने का दस्तावेज़ीकरण किया; गौरतलब है कि प्रोफेसर बीन का 2020 में निधन हो गया था और यह पुरस्कार उनके बेटे ने लिया।
मनोविज्ञान में पोलैंड के मार्सिन ज़ाजेनकोव्स्की और ऑस्ट्रेलिया के गाइल्स गिग्नैक, जिन्होंने दिखाया कि जो लोग आत्ममुग्ध होते हैं उन्हें यदि कहा जाए कि वे बुद्धिमान हैं तो उनका आत्म-सम्मान बढ़ जाता है।
पोषण में नाइजीरिया, टोगो, इटली और फ्रांस के शोधकर्ता, जिन्होंने दिखाया कि इंद्रधनुषी छिपकलियां कुछ प्रकार के पिज्ज़ा का स्वाद पसंद करती हैं।
बालरोग में अमेरिका की जूली मेनेला और गोरी बोचैम्प, जिन्होंने बताया कि स्तनपान कराने वाली माताएं यदि लहसुन खाती हैं तो उनके शिशु अधिक दूध पीते हैं। 
रसायन विज्ञान में अमेरिका के रोटेम नफ्तालोविक, डैनियल नफ्तालोविक और फ्रैंक ग्रीनवे की टीम, जिन्होंने बताया कि खाने के साथ टेफ्लॉन (जिसका इस्तेमाल नॉन-स्टिक कलई चढ़ाने के लिए किया जाता है) का सेवन कैलोरी की मात्रा बढ़ाए बिना भरपेट भोजन और तृप्ति पूरी करने का एक अच्छा तरीका है।
शांति में नीदरलैंड, यूके और जर्मनी के शोधकर्ता, जिन्होंने यह दिखाया कि कैसे थोड़ी मात्रा में शराब पीने से विदेशी (नई) भाषा बोलने की क्षमता बेहतर हो सकती है।
प्रसंगवश, अब तक केवल एक वैज्ञानिक ऐसे हैं जिन्होंने इगनोबेल और नोबेल दोनों पुरस्कार जीते हैं। वे हैं मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञानी आंद्रे जेम। आंद्रे जेम और माइकल बेरी को वर्ष 2000 में, एक मेंढक को उसके आंतरिक चुंबकत्व का उपयोग करके एक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र में हवा में उड़ा देने के लिए भौतिकी श्रेणी में इगनोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 2010 में, प्रो. जेम और कॉन्स्टेंटिन नोवोसेलोव को द्वि-आयामी पदार्थ ग्रैफीन से सम्बंधित अभूतपूर्व प्रयोगों के लिए भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया था। (स्रोत फीचर्स)
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Srote - December 2025
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