नृत्य, संगीत, पेंटिंग या वीडियो गेम जैसे रचनात्मक शौक सिर्फ मज़े के लिए नहीं होते बल्कि ये मस्तिष्क की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को भी धीमा कर सकते हैं। एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने विभिन्न देशों के नर्तकों, संगीतकारों, कलाकारों और गेमर्स का विश्लेषण किया ताकि यह समझा जा सके कि क्या रचनात्मक गतिविधियां मस्तिष्क को जवां बनाए रखने में मददगार होती हैं।
नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित इस अध्ययन में ‘ब्रेन क्लॉक' तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यह मॉडल किसी व्यक्ति की वास्तविक उम्र और उसके मस्तिष्क की दिखाई देने वाली उम्र की तुलना करता है। ब्रेन इमेजिंग और मशीन लर्निंग से यह मापा गया कि मस्तिष्क के अलग-अलग हिस्से कितनी अच्छी तरह आपस में जुड़ते हैं। परिणाम दिखाते हैं कि रचनात्मक गतिविधियों में शामिल होने से मस्तिष्क के कनेक्शन मज़बूत होते हैं, खासकर उन हिस्सों में जो उम्र बढ़ने के साथ सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।
इस अध्ययन के सह-लेखक और न्यूरोसाइंटिस्ट अगस्टिन इबान्ज़ बताते हैं कि पहले के अध्ययनों से पता चला था कि रचनात्मक गतिविधियां मस्तिष्क और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं, लेकिन अब तक इसके जैविक कारण ठीक से समझे नहीं गए थे। यह अध्ययन दर्शाता है कि रचनात्मकता शारीरिक रूप से मस्तिष्क की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर सकती है।
शोधकर्ताओं ने चार रचनात्मक क्षेत्रों में 232 प्रतिभागियों का अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि अधिक कुशल और अनुभवी लोगों के मस्तिष्क उनके कम अनुभवी साथियों की तुलना में जवां दिखाई देते हैं। सबसे मज़बूत असर पेशेवर टैंगो डांसरों में देखा गया, जिनके मस्तिष्क औसतन सात साल युवा दिखे। टैंगो नृत्य में जटिल हाव-भाव, तालमेल, लय और योजना की आवश्यकता होती है, जो मस्तिष्क को स्वस्थ बनाए रखने में विशेष रूप से प्रभावी है।
अध्ययन में यह भी पाया गया कि रचनात्मकता मस्तिष्क के फ्रंटोपैरीटल क्षेत्र की सबसे ज़्यादा रक्षा करती है, जो कार्यशील स्मृति, निर्णय लेने और योजना बनाने के लिए महत्वपूर्ण है। अनुभवी प्रतिभागियों में इस क्षेत्र की कनेक्टिविटी बेहतर थी, खासकर उन हिस्सों में जो गति, तालमेल और लय को नियंत्रित करते हैं। दिलचस्प बात यह है कि नए रचनात्मक कौशल को सीखना भी मस्तिष्क के बुढ़ाने की प्रक्रिया को धीमा करता है, जिससे पता चलता है कि किसी भी उम्र में नया शौक शुरू करना फायदेमंद हो सकता है। कुल मिलाकर, अध्ययन दिखाता है कि रचनात्मकता सिर्फ मनोरंजन नहीं है बल्कि यह मस्तिष्क को जवां बनाए रखती है। (स्रोत फीचर्स)
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Srote - December 2025
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