जिब्राल्टर की चट्टानों पर रहने वाले मशहूर बंदरों में इन दिनों एक अजीब आदत देखी जा रही है। वे भोजन के बाद मिट्टी भी खा रहे हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह उनके अस्वस्थ खान-पान की वजह से हो रहा है जो उस इलाके में आने वाले पर्यटक उनको खिला रहे हैं। 
गौरतलब है कि जिब्राल्टर में करीब 230 मकाक बंदर हैं, जो अलग-अलग समूहों में रहते हैं। हालांकि वहां के अधिकारी उन्हें संतुलित भोजन देते हैं, लेकिन कई पर्यटक नियम तोड़कर उन्हें चिप्स, चॉकलेट, आइसक्रीम और मीठे पेय दे देते हैं। इस कारण धीरे-धीरे उनके खाने की आदत बदल गई है। 2022 से 2024 के बीच किए गए अध्ययन में पाया गया कि उनके भोजन का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा अब मनुष्यों द्वारा दिया जाने वाला जंक फूड है।
वैज्ञानिकों ने देखा कि जो बंदर पर्यटकों के ज़्यादा संपर्क में आते हैं, वे सबसे ज़्यादा जंक फूड और मिट्टी खाते हैं। छुट्टियों के समय, जब पर्यटक अधिक आते हैं और उन्हें ज़्यादा खाना देते हैं, तब मिट्टी खाने की यह आदत और बढ़ जाती है। वहीं, जो बंदर पर्यटन इलाकों से दूर रहते हैं, वे मिट्टी बिल्कुल नहीं खाते - इससे पता चलता है कि यह व्यवहार मनुष्यों के चलते उभरता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि मिट्टी उनके पाचन तंत्र को बचाने में मदद करती है। जंक फूड में वसा, शर्करा और नमक अधिक होता है लेकिन फाइबर कम होता है, जिससे पेट के अच्छे बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ जाता है। मिट्टी में मौजूद खनिज और सूक्ष्मजीव इस संतुलन को सुधारने में मदद कर सकते हैं। कुछ मामलों में यह भी देखा गया कि बंदर आइसक्रीम या ब्रेड खाने के तुरंत बाद मिट्टी खाते हैं, जिससे लगता है कि वे पेट ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं।
यह भी पता चला है कि मिट्टी खाने की यह आदत एक-दूसरे से सीखकर आती है। बंदरों के अलग-अलग समूह अलग तरह की मिट्टी पसंद करते हैं। ज़्यादातर लाल मिट्टी (टेरा रोसा) खाते हैं, जबकि सड़क के पास रहने वाले कुछ बंदर डामर मिली मिट्टी खाते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि यह आदत अधिक पोषण पाने के लिए नहीं है, क्योंकि गर्भवती या बच्चे को दूध पिलाने वाली मादा बंदरों में यह आदत नहीं देखी गई। यानी यह जंक फूड के बुरे असर को बेअसर करने के लिए ही खाई जाती है।
लेकिन मिट्टी खाने का यह तरीका सुरक्षित नहीं है। ज़्यादातर वे जो मिट्टी खाते हैं, सड़क किनारे की होती है, जहां गाड़ियों का प्रदूषण हो सकता है। यह स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है। इसलिए वैज्ञानिक अब इस मिट्टी की जांच करना चाहते हैं कि यह बंदरों के लिए कितनी सुरक्षित है।
वैसे, मिट्टी खाना (जियोफैगी) मनुष्यों और जानवरों दोनों में देखा जाता है और आम तौर पर शरीर को साफ करने या खनिज पाने से जुड़ा होता है। लेकिन बंदरों में यह आदत मनुष्यों की संगत के चलते आई है।
भलाई इसी में है कि लोग बंदरों को खाना देना बंद करें। क्योंकि आपकी साधारण-सी लगने वाली बातें भी उनके स्वास्थ्य और व्यवहार पर बुरा असर डाल सकती हैं। (स्रोत फीचर्स)
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Srote - July 2026
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