तितलियां फूलों से मकरंद चूसती हैं। वालरस और अधिकतर मछलियां अपने भोजन का भक्षण चूस कर करती हैं। हम मनुष्य भी कितनी ही चीज़ें चूसकर निगलते हैं। लेकिन पक्षी? वैज्ञानिकों ने अब तक पक्षियों में चूसने की क्रिया नहीं देखी थी। लेकिन करंट बायोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन बताता है कि सनबर्ड मकरंदपान चूसकर ही करते हैं। यह खोज और भी रोमांचक इसलिए है कि हम मनुष्य या अन्य कशेरुकी जब चूसकर किसी चीज़ का पान करते हैं तो मुंह थोड़ा सिकोड़ते हैं। लेकिन सनबर्ड में यह पहला मामला देखने को मिला है जब कोई कशेरुकी बिना अपने मुंह का आकार बदले, सिर्फ अपनी जीभ से पैदा किए गए सक्शन (खिंचाव) के ज़रिए कुछ पान करता है।  
सनबर्ड और हमिंगबर्ड की चोंच पतली व लंबी होती है, जो अभिसारी विकास का उदाहरण है। अभिसारी विकास यानी कई अलग-अलग असम्बंधित प्रजातियों में एक से पर्यावरणीय दबाव  के कारण एक जैसे अंगों का विकास। जीवविज्ञानी डेविड क्यूबन की इनमें दिलचस्पी जगी। ये दोनों तरह के पक्षी आम तौर पर अपनी चोंच की मदद से घंटीनुमा फूलों के अंदर मौजूद मकरंद पी लेते हैं। हमिंगबर्ड के मकरंद पीने का तरीका ऐसा है कि वे अपनी जीभ को बार-बार बाहर निकालते हैं, जिससे जीभ की नोक पर मकरंद चिपक जाता है। फिर वे जीभ को चोंच के अंदर ले जाते हैं और चोंच को कसकर बंद करके जीभ को निचोड़ते हैं जिससे मकरंद उनके मुंह में आ जाता है, ठीक वैसे ही जैसे तौलिए को निचोड़ने से पानी निकलता है। 
वाशिंगटन युनिवर्सिटी के क्यूबन जानना चाहते थे कि क्या सनबर्ड भी ऐसा ही करती हैं या उनके रसपान का तरीका अलग है। यह पता करने के लिए उन्होंने दक्षिण अफ्रीका और इंडोनेशिया में सनबर्ड की सात प्रजातियों का हाई-स्पीड कैमरों की मदद से मकरंदपान का वीडियो बनाया। इसके लिए उन्होंने थ्री-डी प्रिंटर की मदद से नकली फूल बनाए। इन फूलों के निचले हिस्से को एक स्क्रीन के नीचे रखा, ताकि वे पक्षियों को परेशान किए बिना उनकी जीभ की हरकत को फिल्मा सकें। चूंकि सनबर्ड की जीभ पारभासी होती है, इसलिए वे जीभ से बहते हुए मकरंद को देख सकते थे। आप भी इस प्रक्रिया का आनंद इन वेबसाइट्स पर ले सकते हैं:
वीडियो ध्यान से देखने पर पता चला कि हमिंगबर्ड के विपरीत, सनबर्ड ने अपनी जीभ को फूल के अंदर सिर्फ एक बार डाला। उन्होंने जीभ को वहीं रखा जब तक कि पूरा मकरंद नहीं पी लिया और तब तक अपनी चोंच भी बंद नहीं की। देखा गया कि सनबर्ड मकरंदपान करते समय अपनी जीभ को बस थोड़ा सा ही अंदर खींचते थे। और कभी-कभी चोंच के अंदर जीभ को ऊपर-नीचे भी करते थे।
क्यूबन और उनके साथियों का कहना है कि जीभ की ऐसी हरकत सनबर्ड की जीभ की बनावट के साथ मिलकर, एक खिंचाव (suction) पैदा करती है। इन पक्षियों की जीभ के ऊपरी हिस्से पर एक V-आकार की नाली होती है। जब वे अपनी जीभ को चोंच के ऊपरी हिस्से से दबाते हैं, तो वह चपटी हो जाती है और नाली सिकुड़ जाती है। जीभ को नीचे की ओर खींचने से चोंच के ऊपरी हिस्से और नाली के बीच जगह बन जाती है, जिससे एक खिंचाव पैदा होता है जो फूलों से रस को अंदर खींच लेता है। टीम ने तरल पदार्थों की गतिशीलता की कंप्यूटर मॉडलिंग की और इससे उन्हें समझ आया कि रस को अंदर खींचने के संभावित अन्य कारणों, जैसे केशिका क्रिया, इस मामले में काम नहीं करते। यह जानना कि सनबर्ड अपनी जीभ का इस्तेमाल खाने के लिए कैसे करते हैं, इस बात को समझने में मदद कर सकता है कि फूलों के साथ उनका विकास एक साथ कैसे हुआ और हमिंगबर्ड की तुलना में उनके खाने का तरीका अलग क्यों है। (स्रोत फीचर्स)