चाहे गांव हो या शहर, ऐसा कोई गली-मोहल्ला नहीं होगा जहां कुत्ते दिखाई न दें। जहां-जहां मनुष्यों की आबादी है, कुत्ते वहां-वहां दिख ही जाते हैं। आजकल तो ऐसी खबरें भी सुनने को मिलती हैं कि गली में घूमते कुत्ते कुछ ज़्यादा ही आक्रामक हो गए हैं, और लोग गली के कुत्तों से थोड़ा कतराने लगे हैं। लेकिन कभी कुत्ते मनुष्यों के लिए बहुत खास हुआ करते थे। सुरक्षा से लेकर रास्तों की पहचान तक में वे काम आते थे। हालांकि ऐसा भी नहीं है कि आज कुत्तों का कोई महत्व नहीं रहा। लोग प्रेमवश उन्हें पालते हैं; पुलिस नशीले पदार्थों को ढूंढने में, लोगों की पहचान करने में, कुत्तों की मदद लेती है; लोगों के सहायकों के रूप में भी वे काम आते हैं।  
लेकिन सवाल है कि कुत्ते ठीक कब से मनुष्यों के साथ हैं। और भेड़ियों से कुत्तों में कब विकसित होना शुरू हुए? वैज्ञानिक यह तो जानते हैं कि कुत्ते भूरे भेड़ियों (gray wolves) के वंशज हैं, लेकिन उनके लिए यह सवाल हमेशा सवाल ही बना रहा कि यह विकास प्रक्रिया ठीक-ठीक कब, कहां, कैसे चली।
अब तक, सबसे प्राचीन कुत्ते के जो पुख्ता जीवाश्म प्रमाण मिले हैं वे लगभग 11,000 साल पुराने हैं, जो उत्तर-पश्चिमी रूस के एक खुदाई स्थल से मिले थे। हालांकि इसके बाद और इसके पहले पुरातत्वविदों को खुदाई स्थल से इससे भी कहीं ज़्यादा प्राचीन हड्डियां मिली थीं, जिनकी कद-काठी देखने में भेड़ियों की बजाय कुत्तों जैसी थी - जैसे खोपड़ियां छोटी और चौड़ी थीं। यह इस बात के स्पष्ट संकेत थे कि ये बदलाव भेड़ियों के पालतू बनने की प्रक्रिया के दौरान उनमें आए थे। लेकिन पक्के तौर पर कुछ कहने के लिए इनके बारे में ज़रूरी विस्तृत जेनेटिक जानकारी उपलब्ध नहीं थी। तो मामला वहीं अटका रहा।
अब हालिया अध्ययन इस बारे में थोड़ा प्रकाश डालता है। दरअसल वर्ष 2004 में, मध्य तुर्की के पुनारबश नामक एक शिकारी-संग्राहक काल के खुदाई स्थल से वैज्ञानिकों को एक मानव कब्र के ठीक पास की कब्र में तीन पिल्लों की हड्डियां मिली थीं। हड्डियां इतनी छोटी थीं कि यह बताना मुश्किल था कि वे भेड़िए के पिल्लों की थीं या कुत्तों के पिल्लों की। मानव कब्र के इतने पास मिलने से ऐसा लगता था कि वे कुत्तों के पिल्लों की ही होंगी। लेकिन जब यह पता किया गया कि वे कितनी पुरानी हैं तो पता चला कि वे करीब 15,800 साल पुरानी हैं। यानी कुत्ते के अब तक मिले पक्के प्रमाणों से भी 5000 साल पुरानी! 
फिर क्या था शोधकर्ताओं ने उनमें से एक पिल्ले का डीएनए अनुक्रमण किया। इसके साथ ही, उन्होंने दक्षिणी इंग्लैंड की गॉग गुफाओं (14,300 साल प्राचीन) और उत्तरी स्विट्ज़रलैंड की केसलरलॉक गुफाओं (14,200 साल प्राचीन) से मिले कुत्ते सरीखे जानवरों का भी डीएनए अनुक्रमण किया। विश्लेषण में पता चला कि पुनारबश से मिले अवषेश पूर्णत: कुत्ते के थे, और उसमें भेड़िए जैसे कोई अंश नहीं थे। इसके अलावा अन्य दो गुफाओं से मिले अवशेष भी कुत्तों के ही निकले।
और तो और तुर्की, इंग्लैंड और स्विट्ज़रलैंड के खुदाई स्थलों के बीच भले ही भौगोलिक दूरी और सांस्कृतिक अंतर बहुत ज़्यादा है लेकिन इन तीनों स्थलों से मिले कुत्तों के जीनोम एक-दूसरे के काफी समान थे। मसलन गॉग गुफाओं के रहवासी मैडेलेनियन संस्कृति का हिस्सा थे और वे बेहतरीन गुफा-चित्रकारी और इंसानी खोपड़ियों से प्याले बनाने के लिए जाने जाते हैं। वहीं, पुनारबश में एंटोलियन शिकारी-संग्रहकर्ता लोग रहते थे। जिनके वंशजों ने बाद में युरोप में खेती-बाड़ी की शुरुआत की। शोधकर्ता कहते हैं कि इन अलग-अलग संस्कृतियों के इंसानों के डीएनए में अंतर था, लेकिन कुत्तों के डीएनए में ऐसा कोई अंतर नहीं दिखा। इससे अंदाज़ा मिलता है कि ये सभी कुत्ते एक ही मूल आबादी से विकसित हुए थे। यानी ये कुत्ते युरोप के आदि-कुत्ते थे - कुत्तों की एक ऐसी प्राचीन नस्ल, जो उस समय तक किसी खास काम के लिए विशेष रूप से विकसित नहीं हुई थी। बाद में कुत्तों को कई तरह के काम करने के लिए पाला गया, जैसे शिकार में मदद करने के लिए, रखवाले के तौर पर।
अलग-अलग जगहों पर मिले कुत्तों और इंसानों के डीएनए के आधार पर शोधकर्ताओं का कहना है कि लगभग 21,000 से 12,000 साल पहले तक पूरे दक्षिणी और पूर्वी युरोप में रहने वाले एपिग्रेवेटियन लोग शायद पूरे महाद्वीप में कुत्तों को फैलाने में मददगार रहे होंगे।
एक अन्य अध्ययन भी ऐसा ही कुछ इशारा करता है। जब शुरुआती किसान युरोप में आकर बसे और अपने साथ कुत्ते लाए तब नवागंतुक मनुष्यों ने तो लगभग पूरी तरह से पहले से मौजूद युरोपीय लोगों की जगह ले ली। लेकिन कुत्तों के मामले में ऐसा नहीं हुआ। नवागंतुक कुत्तों के साथ-साथ पहले से मौजूद कुत्ते भी बने रहे। लगभग 9000 से 7000 साल पहले (युरोप में कृषि आगमन से पहले और बाद का समय) के कुत्तों के अवशेषों का विश्लेषण करके पता चला है कि युरोपीय कुत्तों के डीएनए का केवल लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा ही पूर्वी कुत्तों के डीएनए से प्रतिस्थापित हुआ था। इससे पता चलता है कि प्रवासी किसानों को युरोपीय कुत्ते विशेष रूप से उपयोगी लगे होंगे और उन्होंने इन कुत्तों को अपने साथ शामिल किया, न कि उन्हें अपने कुत्तों से बदलने की कोशिश की। लेकिन उत्तरी अमेरिका में इसका ठीक उल्टा हुआ, जहां उपनिवेश बनाने वाले युरोपीय लोगों ने मूल कुत्तों को लगभग पूरी तरह से विलुप्त कर दिया। ऐसा शायद नवागंतुक कुत्तों की उपयोगिता या खूबी के कारण हुआ होगा।
नेचर में प्रकाशित उपरोक्त दोनों ही अध्ययन कुत्ते के विकास और फैलाव पर थोड़ी रोशनी तो डालते हैं लेकिन फिर भी इस सवाल का जवाब अभी पूरा नहीं देते हैं कि अंतत: कुत्ते कहां से आए। उम्मीद है कि आगे ऐसी ही और खोजें और तफ्तीश इस सवाल को सुलझाने में मददगार होंगी। (स्रोत फीचर्स)