अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) ने हाल ही में इस बात की पुष्टि की है कि जिराफ की एक नहीं चार प्रजातियां हैं। यह रिपोर्ट जिराफ के संरक्षण के लिहाज़ से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
दरअसल कुछ साल पहले तक समस्त जिराफ को बस एक ही प्रजाति, जिराफा कैमिलोपार्डेलिस (Giraffa camelopardalis), और उनकी नौ उप-प्रजातियों के रूप में वर्गीकृत किया गया था। लेकिन 2016 में, नामीबिया स्थित जिराफ संरक्षण फाउंडेशन के शोधकर्ताओं ने संपूर्ण अफ्रीका के जिराफों का जेनेटिक अनुक्रमण किया था। इसमें उन्हें विभिन्न जिराफ आबादियों के बीच बहुत अंतर मिला था।
विश्लेषण में उन्हें चार अलग-अलग प्रजातियां समझ आई थीं जिन्हें उन्होंने मसाई (Giraffa tippelskirchi), उत्तरी (Giraffa camelopardalis), जालीदार (Giraffa reticulata) और दक्षिणी जिराफ (Giraffa giraffa) के रूप में वर्गीकृत किया था।
IUCN की हालिया रिपोर्ट ने इसी अध्ययन को आगे बढ़ाया है। हालिया अध्ययन में विशेषज्ञों ने जिराफ का जेनेटिक डैटा तो देखा ही, साथ ही उन्होंने विभिन्न जिराफ आबादियों की अस्थि संरचना भी देखी और उनके भौगोलिक वितरण पर हुए अध्ययनों की समीक्षा भी की। उनके निष्कर्ष भी जिराफ की चार प्रजातियां होने की ओर इशारा करते हैं।

ये निष्कर्ष जिराफ संरक्षण के लिहाज़ से महत्वपूर्ण हैं। दरअसल जिराफ की हर प्रजाति के सामने अलग-अलग खतरे होंगे। यदि हमें उनकी विशिष्ट आवश्यकताएं पता होंगी तो उसी के अनुरूप हम संरक्षण रणनीतियां बना सकते हैं।
मसलन, मध्य अफ्रीकी गणराज्य और दक्षिण सूडान के बीच चल रहे सशस्त्र संघर्ष के चलते उत्तरी जिराफों की संख्या में 1995 के बाद से 70 प्रतिशत की कमी आई है और आज महज 7037 रह गई है। वहीं, उम्दा संरक्षण कार्यक्रमों की बदौलत दक्षिणी जिराफ की आबादी इसी अवधि में दुगनी होकर 68,837 पर पहुंच गई है।
यदि समस्त जिराफ को एक ही प्रजाति के रूप में देखा जाए तो किसी एक स्थान के जिराफ की तादाद में कमी इतनी चिंताजनक नहीं लगेगी क्योंकि अन्य स्थान पर तो वे फलते-फूलते दिखेंगे। लेकिन अब जब हमें पता है कि उत्तरी और दक्षिणी जिराफ दो अलग-अलग प्रजातियां हैं तो उत्तरी जिराफ की संख्या में कमी चिंता जगाती है, उनके संरक्षण के प्रयासों को तेज़ करने की ज़रूरत को रेखांकित करती है। (स्रोत फीचर्स)
