जंगली मधुमक्खियां यूं ही किसी भी फूल पर नहीं जातीं। एक नए अध्ययन से पता चला है कि ये नन्हे परागणकर्ता अलग-अलग फूल चुनकर अपने भोजन में प्रोटीन, वसा और कार्बोहाइड्रेट का संतुलन बनाए रखते हैं। ठीक वैसे ही जैसे इंसान कभी भरपेट खाना पसंद करते हैं तो कभी हल्का-फुल्का, जैसे सलाद।
यह शोध आठ साल तक अमेरिका के कोलोराडो रॉकीज़ पहाड़ों में किया गया, जहां वैज्ञानिकों ने आठ तरह की मधुमक्खियों पर अध्ययन किया। इन मधुमक्खियों द्वारा इकट्ठा किए गए पराग का विश्लेषण कर उन्होंने एक ‘पोषण मानचित्र’ बनाया, जिससे पता चला कि मधुमक्खियां कैसे और क्यों अलग-अलग फूल चुनती हैं।
कुछ फूलों के पराग में सिर्फ 17 प्रतिशत प्रोटीन था, जबकि कुछ में 86 प्रतिशत तक प्रोटीन पाया गया। मौसम का असर भी साफ दिखा: वसंत के फूलों में प्रोटीन ज़्यादा था, जबकि गर्मी के अंत में मिलने वाले फूलों में वसा और कार्बोहाइड्रेट अधिक थे। यही मौसमी बदलाव तय करता है कि मधुमक्खियां किस समय कौन-सा भोजन चुनेंगी।
इस अध्ययन से यह भी पता चला कि मधुमक्खियों की अलग-अलग प्रजातियां अपने शरीर के आकार और जीभ की लंबाई के आधार पर अलग-अलग भोजन रणनीति अपनाती हैं। बड़ी और लंबी जीभ वाली मधुमक्खियां ज़्यादा प्रोटीन वाले पराग चुनती हैं, जबकि छोटी मधुमक्खियां कार्बोहाइड्रेट और वसा वाला पराग पसंद करती हैं। इसके अलावा, अलग-अलग मधुमक्खियां अपनी कॉलोनी के विकास की अवस्था के हिसाब से भी भोजन बदलती हैं।
इस अध्ययन के मुख्य शोधकर्ता जस्टिन बैन के अनुसार पराग में यह विविधता वैसी ही है जैसी इंसानों के खाने में होती है। यानी मधुमक्खियों को भी इंसानों की तरह संतुलित आहार चाहिए।
हालांकि यह अध्ययन पथरीले पर्वतीय स्थल पर हुआ है, लेकिन यह दुनिया भर में परागणकर्ताओं की पोषण ज़रूरतों को समझने के लिए उपयोगी है। सबसे अहम बात यह है कि मधुमक्खियों के लिए एक जैसा भोजन काम नहीं करता - उनके लिए फूलों की विविधता ज़रूरी है ताकि उनकी आबादी स्वस्थ बनी रहे।
बागवान और संरक्षणकर्ता इस जानकारी के आधार पर ऐसे बगीचे और प्राकृतवास बना सकते हैं जो साल भर मधुमक्खियों की बदलती पोषण ज़रूरतों को पूरा करें। आज परागण करने वाले कीट जलवायु परिवर्तन, प्राकृतवास के नष्ट होने और पोषण की कमी जैसी बड़ी चुनौतियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में यह अध्ययन बताता है कि विविधता बनाए रखना कितना ज़रूरी है। (स्रोत फीचर्स)
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Srote - November 2025
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