वीनस फ्लाईट्रैप (Dionaea muscipula) उन चुनिंदा पौधों में शुमार है जो कीटों को अपना शिकार बनाते हैं और उनसे अपना कुछ पोषण हासिल करते हैं। वीनस फ्लाईट्रैप अमरीका के उत्तरी और दक्षिणी कैरोलिना के दलदली इलाके में पाया जाता है। चूंकि इन दलदली इलाकों की मिट्टी में कुछ विशेष पोषक तत्व कम होते हैं इसलिए यह पौधा इसकी भरपाई लिए कीटों का शिकार करता है। वैसे तो इस मशहूर कीटभक्षी पौधे द्वारा अपने शिकार को पकड़ने का तरीका सर्वविदित है। लेकिन यही तरीका वैज्ञानिकों के बीच उत्सुकता बनाए हुए है।  
दरअसल, वीनस फ्लाईट्रैप ज़मीन से सटकर लगने वाला पौधा है। जिसमें लगभग भूमिगत गांठ-नुमा संरचना (तना) से रोज़ेट जैसी आकृति बनाती 4 से 7 पत्तियां निकली होती हैं, जिनकी अधिकतम लंबाई 10 सेंटीमीटर तक जाती है। इसकी पत्तियां दो खंडों में बंटी होती हैं। पत्ती का निचला भाग सामान्य पत्ती की तरह होता है और प्रकाश संश्लेषण करता है। पत्ती के ऊपरी छोर पर ट्रैप (शिकंजे) होते हैं, जो शिकार को पकड़ने का काम करते हैं। जैसे-जैसे पत्ती लंबी और परिपक्व होती जाती है, ये ट्रैप भी परिपक्व होते जाते हैं। परिपक्व ट्रैप शिकार पकड़ते हैं। ये ट्रैप हरे-लाल रंग के दो अर्ध-अंडाकार हिस्सों से बने होते हैं जो एक कब्जे-नुमा संरचना से जुड़े होते हैं। इनके सिरों पर कांटे-नुमा नुकीली संरचनाएं होती हैं, और दो अंदर की सतह पर रोम जैसी संरचनाएं होती हैं। सामान्य स्थिति में ये ट्रैप तने हुए, बाहर को थोड़ा मुड़कर (घुमाव लिए) खुले रहते हैं। किसी कीट के ट्रैप की अंदरुनी सतह पर बैठने का संकेत मिलते ही दोनों पाट झट से बंद हो जाते हैं और कीट बेचारा फंस जाता है। पत्तियों के बंद होने की गति बहुत तेज़ होती है, कीट के बैठे होने का संकेत मिलने के सेकंड के दसवें हिस्से के भीतर ये बंद हो जाती है। और इसी गति ने वैज्ञानिकों को उलझा रखा है।
वे दशकों से यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर ट्रैप इतनी तेज़ी से बंद कैसे हो जाता है। कुछ अध्ययनों ने बताया था कि जब कीट ट्रैप पर मौजूद रोम-नुमा संरचनाओं को छूते हैं, तो पत्ती में विद्युत संकेत संचारित होता है, जिससे वह अपने शिकार को पकड़ने और पचाने के लिए हरकत में आ जाती है। फिर 2005 में, फ्रांस की ऐक्स-मार्सेली युनिवर्सिटी के भौतिक शास्त्री योएल फॉर्टेरे और उनके साथियों ने बताया था कि जब ट्रैप खुली स्थिति में होता है, यानी उसके दोनों पाट बाहर की तरफ मुड़े हुए होते हैं, तो वे तनाव की स्थिति में होते हैं। जब कोई कीट ट्रैप पर बैठता है, तो यह तनाव अचानक खत्म हो जाता है — जिससे दोनों हिस्से अंदर की तरफ मुड़ जाते हैं और कीट की शामत आ जाती है।
हाल ही में उन्होंने रहस्य को सुलझाने में एक कदम और बढ़ाया गया है। उन्होंने पता लगा लिया है कि यह तनाव टूटता कैसे है। दरअसल, इस सम्बंध में वैज्ञानिकों के बीच दो मत थे कि ट्रैप का यह तनाव खत्म कैसे होता है। एक मत के अनुसार, पानी ट्रैप की अंदरूनी सतह से बाहरी सतह की एपिडर्मल कोशिकाओं में तेज़ी से जाता है, जिससे सूजन आती है और तनाव खत्म होता है। दूसरे मत के अनुसार, बाहरी एपिडर्मल कोशिकाओं की सख्त भित्ति अचानक नरम पड़ जाती हैं, जिससे तनाव खत्म हो जाता है।
फॉर्टेरे और उनकी टीम ने सैकड़ों फ्लाईट्रैप पौधों पर दोनों संभावनाओं को जांचने के लिए कई अलग-अलग प्रयोग किए और पाया कि कोशिकाओं की भित्ति नरम पड़ने के कारण तनाव खत्म होता है। 
क्या वास्तव में पानी के बहाव के कारण तनाव खत्म होता है? इस संभावना को जांचने के लिए उन्होंने अंदरूनी सतह से एपिडर्मल कोशिकाओं तक पानी के पहुंचने का समय मापा। पाया कि पानी को अंदरुनी सतह से एपिडर्मल कोशिकाओं तक पहुंचने में 30 से 150 सेकंड लगते हैं — यह समय ट्रैप के झटके से बंद होने की गति से कई गुना अधिक है, इसलिए यह वजह तो नहीं लगती।
दूसरी संभावना को जांचने के लिए शोधकर्ताओं ने ट्रैप की एपिडर्मल कोशिकाओं के तनाव को मापा और पाया कि यह तनाव खत्म होने के कारण ही ट्रैप बंद होता है। यानी जब कोई कीट ट्रैप पर रेंगता है तो ट्रैप की बाहरी सतह पर मौजूद कोशिकाएं नरम पड़ जाती हैं और ट्रैप बंद हो जाता है। 
हालांकि, शोधकर्ता एकदम सटीक जवाब पर अब भी नहीं पहुंचे हैं। यह सवाल अब भी अनुत्तरित है कि ट्रैप की कोशिका भित्ति को क्या चीज़ नरम करती है। लेकिन साइंस जर्नल में उन्होंने इसके कुछ संभावित कारणों की ओर इशारा किया है। इसके अनुसार, पौधों की कोशिका भित्ती नरम जेल जैसे मैट्रिक्स और सख्त रेशों के जाल से बनी होती है। जब कीट ट्रैप पर आता है तो कुछ एंज़ाइम्स स्रावित होते हैं, जो रेशों और मैट्रिक्स के बीच के जोड़ों को कमज़ोर कर देते हैं और वे नरम पड़ जाते हैं और तनाव खत्म हो जाता है।
वैसे वैज्ञानिक तो अपनी जिज्ञासा शांत करने के लिए अनसुलझी गुत्थियां सुलझाते रहते हैं। लेकिन जिज्ञासा के साथ-साथ स्वार्थ भी चलता है। उम्मीद है कि ट्रैप बंद होने की प्रक्रिया को अच्छी तरह समझकर मनुष्य के लिए काम आने वाले रोबोट्स को बेहतर और लचीला बनाया जा सकेगा: इस कार्यप्रणाली के आधार पर ऐसे रोबोट बनाए जा सकते हैं जो ज़रूरत पड़ने पर सख्त से नरम पड़ जाएं, या नरम से सख्त। (स्रोत फीचर्स)

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