हमारे लिए सर्दियों के मौसम का मतलब गर्म कपड़े, हीटर और अधिक समय घरों के अंदर बिताना है। लेकिन जंगली जीवों के पास ऐसी कोई सुविधा नहीं। कीट, सरीसृप, पक्षी और स्तनधारी - सभी ने सर्दी से निपटने के अलग-अलग तरीके विकसित किए हैं। कोई दुबक जाता है, कोई अपनी गतिविधि धीमी कर लेता है, कोई झुंड में सटकर बैठकर गर्मी बनाए रखता है, तो कोई ठंड से बचने के लिए लंबी यात्रा करता है। ऐसे ही कुछ जीवों केे खास तरीकों पर यहां चर्चा की जा रही है।
मकड़ियों का तरीका
मकड़ियां देखने में ज़रा सी दिखती हैं, लेकिन कई मकड़ियां सर्दियों के लिए अच्छी तरह तैयार होती हैं। उत्तरी अमेरिका में ज़मीन पर रहने वाली मकड़ियां, जैसे वुल्फ स्पाइडर, पत्तों की चादर, लकड़ियों के नीचे या मिट्टी में थोड़ी गहराई में जाकर सर्दी बिताती हैं। बर्फ के नीचे का यह इलाका सतह की तुलना में कुछ डिग्री अधिक गर्म होता है।
मकड़ियां अपने शरीर के तापमान का नियंत्रण खुद नहीं कर सकतीं, इसलिए ठंड बढ़ने पर उनकी गतिविधियां धीमी हो जाती हैं। इससे उनकी ऊर्जा बचती है। सर्दियों के हल्के गर्म दिनों में कुछ मकड़ियां थोड़ी देर के लिए सक्रिय भी हो जाती हैं। जाल बनाने वाली कई मकड़ियां अपने अंडों को रेशम की मोटी तह वाले थैलों में रखती हैं। कुछ प्रजातियों में बच्चे पूरी सर्दी इसी थैले में साथ-साथ रहते हैं और बसंत आने पर बाहर निकलते हैं।
कुछ मकड़ियां तो और भी खास तरीका अपनाती हैं - वे अपने शरीर में ‘एंटीफ्रीज़’ जैसे रसायन बना लेती हैं। ये रसायन शरीर के अंदर बर्फ जमने से रोकते हैं, जिससे मकड़ियां बेहद कम तापमान में भी जीवित रह पाती हैं।
कछुए: बिना फेफड़ों के सांस
ठंड बढ़ते ही कछुओं की कई प्रजातियां ब्रूमेशन में चली जाती हैं, जो सरीसृपों में शीतनिद्रा जैसा होता है। इस दौरान उनकी गतिविधियां बहुत धीमी हो जाती हैं। ज़मीन पर रहने वाले कछुए, जैसे बॉक्स टर्टल, मिट्टी में दबकर जमा की हुई चर्बी के सहारे सर्दी काट लेते हैं।
पानी में रहने वाले कछुए, जैसे पेंटेड टर्टल, पूरी सर्दी तालाब या झील के पेंदे में रहते हैं, तब भी जब ऊपर की सतह पूरी तरह बर्फ बन जाती है। ठंडा पानी उनके शरीर को ठंडा रखता है, जिससे उन्हें कम ऑक्सीजन की ज़रूरत पड़ती है। ये कछुए हवा से सांस लेने के बजाय अपनी त्वचा, मुंह और एक विशेष छिद्र के ज़रिए सीधे पानी से ऑक्सीजन सोख लेते हैं।
जब ऑक्सीजन बहुत कम हो जाती है, तो कुछ कछुए बिना ऑक्सीजन के भी ऊर्जा बनाते हैं। इससे उनके शरीर में हानिकारक अम्ल बनता है लेकिन अपने खोल के कैल्शियम से वे उसे निष्क्रिय कर देते हैं। यानी उनका खोल ही जाड़ों का सुरक्षा कवच है।
मधुमक्खियां: हम साथ-साथ हैं
अधिकांश कीटों से अलग, मधुमक्खियां सर्दियों में भी सक्रिय रहती हैं। जैसे ही ठंड बढ़ती है, युरोपीय मधुमक्खियां छत्ते के अंदर रानी के चारों ओर जमा हो जाती हैं। कामगार मधुमक्खियां अपने पंख हिलाए बिना उड़ान वाली मांसपेशियों को तेज़ी से सिकोड़ती-फैलाती हैं, जिससे शरीर में गर्मी पैदा होती है। मधुमक्खियां लगातार अपनी स्थिति बदलती रहती हैं। इससे रानी और पूरा छत्ता कड़ी ठंड में भी सुरक्षित रहता है।
इस रणनीति के लिए लंबी तैयारी ज़रूरी होती है। गर्मियों में मधुमक्खियां रस इकट्ठा कर लगभग 40 किलो शहद जमा कर लेती हैं, ताकि पूरी सर्दी उसी से ऊर्जा मिलती रहे। वे छत्ते की जगह भी काफी सोच-समझकर चुनती हैं, अक्सर खोखले पेड़ों के अंदर, जहां गर्मी बेहतर बनी रहती है।
चिपमंक: छोटी-छोटी नींद
चिपमंक न तो पूरी तरह शीतनिद्रा में जाते हैं और न ही पूरी तरह सक्रिय रहते हैं। वे ज़मीन के नीचे बने जटिल बिलों में रहते हैं, जहां सुरंगें और भोजन से भरे कक्ष होते हैं।
पूर्वी चिपमंक कुछ दिनों के लिए टॉरपर नाम की हल्की नींद में चले जाते हैं। इस दौरान उनकी दिल की धड़कन बहुत कम हो जाती है और शरीर का तापमान बिल की ठंडक के अनुसार गिर जाता है। हर कुछ दिनों में वे जागते हैं, जमा किया हुआ खाना खाते हैं और फिर दोबारा टॉरपर में चले जाते हैं। रुक-रुक कर सोने की यह रणनीति उन्हें ऊर्जा बचाने में मदद करती है और सतर्क भी रखती है।
पक्षी: गर्मी की ओर प्रवास
कई पक्षियों के लिए सर्दी से बचने का सबसे अच्छा तरीका है उस इलाके से पलायन कर जाना। अमेरिका और कनाडा में 70 प्रतिशत से ज़्यादा पक्षी सर्दियों में दक्षिण की ओर उड़ जाते हैं, जहां मौसम गर्म होता है और भोजन आसानी से मिलता है।
कुछ पक्षियों की यात्राएं हैरान कर देने वाली होती हैं। आकार में एक सिक्के जितनी छोटी रूबी-थ्रोटेड हमिंगबर्ड एक ही दिन में 700 किलोमीटर चौड़ी मेक्सिको की खाड़ी पार कर लेती है। वहीं रूफस हमिंगबर्ड जैसे कुछ पक्षी दक्षिण की बजाय पूर्व की ओर उड़ते हैं और फ्लोरिडा या लुइसियाना पहुंच जाते हैं।
पक्षियों का प्रवास उनके स्वभाव, दिन-रात की लंबाई, हवा की दिशा और भोजन की उपलब्धता से तय होता है। यह सफर जोखिम भरा होता है, लेकिन ऐसा करके वे कड़ाके की ठंड से बच पाते हैं।
प्रकृति अद्भुत है, और उसमें रहने वाले जीव और उनके तरीके और भी अद्भुत। उन्हें देखें, समझें, सराहें। (स्रोत फीचर्स)