किशोर पंवार                                                                                                                                       [Hindi PDF, 122 kB]

जो तितलियाँ अकसर हमारे आस पास दिखाई देती हैं, उनमें से एक कॉमन लाइम बटरफ्लाई भी है। यह अपेक्षाकृत थोड़ी बड़ी तितली है। जब यह हमारे इर्द-गिर्द हो तो इसे हम दो स्थितियों में देख सकते हैं। एक, जब वह अपने पंख समेटे फूल-पत्तियों पर बैठती है, और दूसरी स्थिति, जब यह अपने चारों पंख पसारती है।

जब लाइम बटरफ्लाई अपने पंख समेटे होती है तब इसके दो एंटीने, बड़ी-बड़ी आँखें और शरीर का पिछला इल्लीनुमा हिस्सा दिखता है। इस स्थिति में इसके कुण्डलित प्रोबोसिस (सिर पर स्थित लम्बे उपांग) स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। इसके सिमटे हुए पंखों की निचली काली-भूरी सतह पर एक बड़ा ‘आई-स्पॉट’ खासतौर पर दिखता है जो बड़ी-बड़ी आँखों का आभास देता है।

जब तितली पंख पसारे बैठती है तो पंखों की दूसरी सतह दिखाई देती है। और हमारे सामने एक अलग नज़ारा प्रस्तुत होता है। हल्के काले रंग के पंखों पर बने सुन्दर, सुनहरे पीले छोटे-बड़े धब्बे इसे चित्ताकर्षक बनाते हैं। इसके सिर के पास वाले पंख के हिस्से पर काले-पीले रंग का संयोजन देख ऐसा लगता है कि जैसे प्रकृति ने वहाँ शतरंज बिछा दी हो। पंखों के बाहरी किनारों पर सफेद रंग के धब्बे देख लगता है जैसे काले कपड़े पर सफेद रंग की सुन्दर-सी झालर बनी हो। ध्यान से देखने पर काले और सफेद रंग की आकृतियाँ एकान्तर क्रम में नज़र आती हैं। पंखों के पिछले हिस्से पर अन्दर की तरफ बने दो केसरिया फ्लोरोसेन्ट पीले-नीले धब्बे मोर पंख का आभास देते हैं।

तितली की इस मोहक छवि से बाहर निकलते हुए इसके जीवन की विविध अवस्थाओं की ओर चलते हैं। तितली के अण्डे खोजना थोड़ा कठिन काम है। मुश्किल इसलिए है क्योंकि ये आकार में बहुत छोटे होते हैं और तितली चुनिन्दा पौधों पर ही अण्डे देती हैं जिनसे उनके लार्वा को भोजन मिल सके। मैंने लाइम बटरफ्लाई के अण्डे बेलपत्र पर देखे थे। आप इसके अण्डे लाइम अर्थात नींबू कुल के पौधों की पत्तियों पर खोजने की कोशिश कीजिए, हो सकता है आपको भी अण्डों को पास से देखने का मौका मिल जाए।
बर्ड ड्रॉपिंग लार्वा: बेलपत्र पर सफेद घेरा बनाकर लाइम बटरफ्लाई के लार्वा को दिखाया गया है। सरसरी तौर पर देखने पर ऐसा प्रतीत होता है कि मानो किसी पक्षी ने पत्ती पर बीट कर दी हो।

इस तितली की जो दूसरी अवस्था़ हमें दिखती है वह है इसका लार्वा। आम तौर पर हम इसे इल्ली के नाम से जानते हैं। लाइम बटरफ्लाई का लार्वा शुरुआत में ऐसा दिखता है जैसे किसी पक्षी ने पत्ती पर बीट कर दी हो। इसी कारण इन्हें ‘बर्ड ड्रॉपिंग लार्वा’ भी कहा जाता है।लाइम बटरफ्लाई का लार्वा हरे रंग का काफी मोटा, लगभग छोटी अँगुली की मोटाई के बराबर होता है। लार्वा पत्तियों को कुतर-कुतर कर खाता है और बढ़ता रहता है। यहाँ पर दिया गया चित्र बेलपत्र पर पल रहे लार्वा का है।

लगभग छिंगली अँगुली के बराबर मोटाई की इल्ली। एक कुतरी हुई पत्ती की निचली सतह पर शंखी चिपकी हुई दिखाई देगी। चित्र में सफेद घेरे में दिख रही है यह।

अगली अवस्था प्यूपा (शंखी) है। ये प्यूपा वैसे तो कहीं भी चिपके मिल सकते हैं। परन्तु अधिकांशत: वे अपने पोषक पौधों के इर्द-गिर्द ही मिलते हैं। ऊपर छपे चित्र को ध्यान से देखिए, कटी-फटी पत्ती की निचली सतह से एक प्यूपा चिपका दिखाई दे रहा है।
शंखी के बारे में अभी कुछ और बातें बाकी हैं। कवर 3 का चित्र देखिए, कितनी सुरक्षित जगह पर रेशमी धागों से लटकी है यह शंखी। पत्तियों जैसा हरे रंग का छद्मावरण इन्हें शिकार होने से बचाता है। प्यूपा के शिकार हो जाने की सम्भावना ज़्यादा होती है, क्योंकि यह लगभग निष्क्रिय अवस्था है। बिना हिले-डुले कई सप्ताह तक ये ऐसे ही लटके रहते हैं। प्यूपा के परिपक्व होने पर उसमें से एक बहुत ही सुन्दर, नए रूप-रंग का वयस्क निकलता है। प्यूपा से निकलकर नई-नवेली तितली कुछ देर अपने गीले पंखों को सुखाती है और फिर उड़ जाती है, एक नए सफर पर।


आलेख एवं फोटोग्राफ: डॉ. किशोर पंवार: होल्कर साइन्स कॉलेज, इन्दौर में वनस्पति विज्ञान के प्राध्यापक। विज्ञान लेखन एवं नवाचार में रुचि रखते हैं।