Sandarbh - Issue 165 (July-August 2026)
- Copy Yourself, Protect Yourself – What Is Automimicry? by Sanket Raut

खुद की नकल, खुद की सुरक्षा - संकेत राउत [Hindi,PDF]
मान लीजिए, आप एक मासूम कनखजूरे का शिकार करना चाहते हैं। आप धीरे-धीरे अपनी उँगलियाँ उसके सिर की ओर बढ़ाते हैं। मगर यह क्या – कनखजूरे के सिर तो दोनों ओर जान पड़ते हैं! असली सिर कौन-सा है? आप पलभर के लिए हिचकिचाते हैं, अक्कड़-बक्कड़ करके किसी एक सिर को पकड़कर दबोच देते हैं! और उसी समय शातिर कनखजूरा अपने असली सिर से आपकी ज़ालिम उँगली को डंक मारता है और अपनी जान बचाकर रेंग जाता है। आपकी ज़ालिम उँगली में उठता दर्द, आपको उस मासूम कनखजूरे की ‘ऑटोमिमिक्री’ की याद दिलाता रहेगा। इस तरह की अन्य नकलों को जानने-समझने के लिए पढ़िए, संकेत राउत का यह लेख। - Al-Khwarizmi and His Algebra by Aamod Karkhanis
ख्वारिज़्म और उनका अलज़ाब्र - आमोद कारखानीस [Hindi,PDF]
गणित के इतिहास की बात हो और बगदाद का ज़िक्र ना हो, यह कैसे हो सकता है! अरब साम्राज्य जब अपने चरम पर था, तो उस साम्राज्य को कायम रखने के लिए किस तरह का गुणा-भाग लगता होगा? अन्य समकालीन साम्राज्यों और उनके गणितीय ज्ञान का कितना असर अरब के गणित पर पड़ा होगा? और कौन हैं यह ख्वारिज़्म और क्या है उनका यह अलज़ाब्र? जानिए यह सब, आमोद कारखानीस के इस लेख में। - The Difference Between Yesterday and Tomorrow by Ajay Sharma
कल और कल में फर्क: एक भौतिकीय नज़रिया - अजय शर्मा [Hindi,PDF]
कल जो था, वह आज नहीं है, और आज जो है, वह कल नहीं होगा। मगर इन बदलावों के क्या मायने हैं? समय का एक सीध में बहना मालूम पड़ना, आखिर कैसे? बदलाव अव्यवस्था या एंट्रोपी में इज़ाफा करते हैं, और बदलाव ही समय का इशारा करते हैं। मगर अव्यवस्था अगर व्यवस्था में तब्दील होने लगे तो क्या समय उलटा बहने लगेगा? थोड़ा समय निकालकर, समय को भौतिकी की नज़र से समझने की कोशिश कीजिए। समझने के इस सफर में, अजय शर्मा का यह लेख मददगार साबित हो सकता है। क्या आपका यह लेख पढ़ना दर्शनीय होगा? - The Hidden World Revealed -- A Conversation with Yuvan Avis by Fazal Rashid
ओझल दुनिया का नुमाया होना: युवान एविस के साथ फज़ल रशीद की बातचीत [Hindi,PDF]
सम्भावना है कि यह लेख पढ़ते वक्त आपका पाला किसी-न-किसी तरह के कीड़े से पड़े। यानी, रोज़मर्रा के किसी आम-से काम के दौरान भी आपका नाता कीड़ों से जुड़ता ही है। मगर आप अपने इतने निकटतम साथियों के बारे में कितना सोचते हैं? सोचते भी हैं तो क्या सोचा करते हैं? क्या कहानियाँ हैं इनकी? अमूमन ज़ाहिर वजूद के बावजूद ओझल और ना-काबिल-ए-बर्दाश्त करार दिए जाने वाले इन जीवों का जीवन कितना गहरा और कितना तिलस्मी होता है, यह युवान और फज़ल की इस गुफ्तगू में झलकता है। इस दुनिया में जीने का हम-सा (या शायद, हमसे भी ज़्यादा) हक, क्या इन सहचरों को मिल सकता है? इस साक्षात्कार को पढ़ते हुए, ज़रा सोचिएगा। - The Professor Who Taught Us That Stones Could Speak: Remembering Shireen Ratnagar by Parvinder Singh
जिन्होंने हमें सिखाया कि पत्थर बोल सकते हैं: कुछ यादें, कुछ विरासत - परविंदर सिंह [Hindi,PDF]
इतिहास क्या है? साक्ष्य, हमारा आज, और इन दोनों के आधार पर बने सिद्धान्त – यह सब मिलकर हमारे गुज़रे वक्त की कहानियाँ बुनते हैं। शिरीन रत्नागर ऐसी कहानियाँ बुनती थीं, और फिर हम सबको सुनाया करती थीं – एक इतिहासकार के तौर पर, एक शोधकर्ता के तौर पर, एक शिक्षक के तौर पर, और एक ज़िन्दादिल इन्सान के तौर पर। उनके इतिहास, उनके जीवन के साक्ष्यों और उनके सिद्धान्तों से क्या कहानी बुनती है, यह परविंदर सिंह और अजय दांडेकर के लेखों में जाना जा सकता है। - Shireen: A Strict Academician, Yet Full of Life by Ajay Dandekar
शिरीन: सख्त अकेडमीशियन लेकिन ज़िन्दादिल इन्सान - अजय दांडेकर [Hindi,PDF]
इतिहास क्या है? साक्ष्य, हमारा आज, और इन दोनों के आधार पर बने सिद्धान्त – यह सब मिलकर हमारे गुज़रे वक्त की कहानियाँ बुनते हैं। शिरीन रत्नागर ऐसी कहानियाँ बुनती थीं, और फिर हम सबको सुनाया करती थीं – एक इतिहासकार के तौर पर, एक शोधकर्ता के तौर पर, एक शिक्षक के तौर पर, और एक ज़िन्दादिल इन्सान के तौर पर। उनके इतिहास, उनके जीवन के साक्ष्यों और उनके सिद्धान्तों से क्या कहानी बुनती है, यह परविंदर सिंह और अजय दांडेकर के लेखों में जाना जा सकता है। - Children as Future Citizens and Civics: Part 9 by Prakash Kant
बच्चे बतौर भावी नागरिक और नागरिकशास्त्र - प्रकाश कान्त [Hindi,PDF]
पंचायत, हाट, मण्डी, बैंक, टैक्स, और सरकार – नागरिकशास्त्र के ये विषय बच्चों के इर्द-गिर्द ही तो हैं! तो फिर इनकी समझ बनवाने के लिए मशीनी ढंग से कोशिश क्यों करें? बच्चों की परिचित दुनिया से उठते ज्ञान की मदद से अध्यापन करते हैं ना, बच्चों को मज़ा आएगा, और शिक्षक को भी। एक शिक्षक बतौर अपने ऐसे ही अनुभवों, उनसे जुड़ी चुनौतियों और सीखों को प्रकाश कान्त बयान करते हैं अपने इस लेख में। - Inspector Matadeen Chand Par by Harishankar Parsai
इंस्पेक्टर मातादीन चाँद पर - हरिशंकर परसाई [Hindi,PDF]
चाँद की पुलिस ठीक से काम नहीं कर रही। लिहाज़ा, चाँद सरकार भारत सरकार के ‘रामराज’ से मदद की गुहार करती है, और इंस्पेक्टर मातादीन को बतौर सलाहकार चाँद पर भेज दिया जाता है। मातादीन चाँद पुलिस को इतना ठीक कर देते हैं कि चाँद सरकार हाथ-पैर जोड़कर उन्हें वापस ‘रामराज’ भेज देना चाहती है। मगर ऐसा भी क्या किया इंस्पेक्टर मातादीन ने? जानिए, हरिशंकर परसाई के इस व्यंग्य को पढ़कर। - Why Does the Indian Rupee Fall Against the US Dollar? From Sawaliram
सवालीराम: भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले क्यों गिरता है? इसके पीछे कौन-कौन से कारण होते हैं? क्या रुपया गिरने से भारत को नुकसान पहुँचता है, और क्या इस स्थिति से किसी देश को लाभ भी होता है? – सवालीराम [Hindi,PDF]
‘पेड़ से टूटकर सेब नीचे क्यों गिरता है?’ और ‘अमेरिकी डॉलर के सामने भारतीय रुपया क्यों गिरता है?’ इन दो सवालों में से पहला तो एक अटल सत्य पर सवाल है, मगर क्या दूसरा सवाल भी उसी तरह से किसी अटल सत्य पर आधारित है? सवालीराम से पूछे गए सवाल का जवाब पढ़ते हुए सोचिएगा।
